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महापौर के लोकसभा अध्यक्ष को धोक देने पर सियासी विवाद, समर्थकों ने बताया वरिष्ठों के सम्मान की परंपरा

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद कांग्रेस की ओर से सवाल, समर्थकों ने इसे व्यक्तिगत आस्था और वरिष्ठ नेता के सम्मान से जोड़ा

संवाददाता
विशेष संवाददाता विशेष रिपोर्टर
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महापौर के लोकसभा अध्यक्ष को धोक देने पर सियासी विवाद, समर्थकों ने बताया वरिष्ठों के सम्मान की परंपरा
महापौर के लोकसभा अध्यक्ष को धोक देने पर सियासी विवाद, समर्थकों ने बताया वरिष्ठों के सम्मान की परंपरा
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कोटा। कोटा नगर निगम की नवनिर्वाचित महापौर अनुसुईया गोस्वामी द्वारा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के कोटा स्थित आवास पर जाकर धोक देने का वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। कांग्रेस की ओर से इस घटनाक्रम को लेकर सवाल उठाए गए हैं, वहीं महापौर के समर्थकों ने इसे व्यक्तिगत आस्था, भारतीय परंपरा और वरिष्ठ नेता के प्रति सम्मान से जोड़कर देखा है।

सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में महापौर को बिरला के आवास के बाहर झुककर अभिवादन करते हुए देखा गया। इसके बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा सहित कांग्रेस नेताओं ने सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर सवाल उठाए। बहस का एक प्रमुख मुद्दा यह रहा कि निर्वाचित महापौर के लिए राजनीतिक और संवैधानिक भूमिकाओं के बीच सार्वजनिक आचरण की क्या मर्यादा होनी चाहिए।

वहीं, महापौर के समर्थकों का कहना है कि किसी वरिष्ठ व्यक्ति के घर जाकर उनका आशीर्वाद लेना भारतीय सामाजिक और पारिवारिक परंपरा का हिस्सा है। उनके अनुसार, महापौर द्वारा बिरला के प्रति सम्मान व्यक्त करने को व्यक्तिगत आस्था और वरिष्ठों के सम्मान के संदर्भ में भी देखा जाना चाहिए।

चुनाव के बाद सामने आया घटनाक्रम

अनुसुईया गोस्वामी को 25 सितंबर को कोटा नगर निगम का महापौर चुना गया। उन्होंने कांग्रेस की सुनीता सुमन को 65-35 मतों से हराया। 100 सदस्यीय सदन में भाजपा के 57 पार्षद थे, जबकि कांग्रेस के 39 पार्षद थे।

महापौर चुनाव के दौरान भी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप सामने आए थे। चुनाव के बाद गोस्वामी ने पदभार संभालते हुए शहर में सफाई, सौंदर्यीकरण और जनस्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की बात कही थी।

संवैधानिक पद और राजनीतिक आचरण पर बहस

इस पूरे घटनाक्रम ने निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के सार्वजनिक आचरण, राजनीतिक संगठन के साथ उनके संबंध और संवैधानिक पदों की गरिमा से जुड़े सवालों को चर्चा में ला दिया है। समर्थक इसे व्यक्तिगत सम्मान और परंपरा के रूप में देखते हैं, जबकि आलोचक सार्वजनिक पद की राजनीतिक निष्पक्षता और जनप्रतिनिधि की जवाबदेही के संदर्भ में सवाल उठा रहे हैं।

इस विवाद का केंद्र फिलहाल यही है कि महापौर द्वारा लोकसभा अध्यक्ष के आवास पर जाकर धोक देने की घटना को व्यक्तिगत-सांस्कृतिक आचरण माना जाए या निर्वाचित पदाधिकारी के राजनीतिक आचरण के

संदर्भ में देखा जाए।

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लेखक

विशेष संवाददाता

नागरिक अभिव्यक्ति विशेष डिजिटल रिपोर्टर एवं विश्लेषक।

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