ADVERTISEMENT
ब्रेकिंग न्यूज़
• हाड़ौती अंचल: कोटा में नए रिवरफ्रंट प्रोजेक्ट के लिए 120 करोड़ का अतिरिक्त बजट स्वीकृत • चुनाव आयोग ने आगामी निकाय चुनाव हेतु वोटर लिस्ट अपडेशन की समय सीमा बढ़ाई • राजस्थान बोर्ड परीक्षा 2026 की समय सारिणी घोषित, शिक्षा विभाग की बड़ी तैयारी • टी20 वर्ल्ड कप: भारतीय टीम ने दूसरे मुकाबले में भी दर्ज की धमाकेदार जीत
नागरिक अभिव्यक्ति
होम / चुनाव / लेख विस्तार
चुनाव

कोटा में अब महापौर की कुर्सी पर नजर, भाजपा में चार नाम चर्चा में

ओबीसी महिला के लिए आरक्षित पद पर सीमा चौधरी, अनुसुईया गोस्वामी, प्रतिभा सुमन और प्रमिला वर्मा के नाम सामने आए

संवाददाता
विशेष संवाददाता विशेष रिपोर्टर
अक्षर आकार:
कोटा में अब महापौर की कुर्सी पर नजर, भाजपा में चार नाम चर्चा में
कोटा में अब महापौर की कुर्सी पर नजर, भाजपा में चार नाम चर्चा में
ADVERTISEMENT
खबर शेयर करें:

कोटा। नगर निगम चुनाव में बहुमत हासिल करने के बाद भाजपा में अब महापौर पद के संभावित चेहरों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। कोटा में पहली बार यह पद ओबीसी महिला के लिए आरक्षित हुआ है। ऐसे में सभी की निगाहें पार्टी नेतृत्व के फैसले पर हैं। फिलहाल सीमा चौधरी, अनुसुईया गोस्वामी, प्रतिभा सुमन और प्रमिला वर्मा के नाम राजनीतिक चर्चाओं में हैं। हालांकि किसी नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

वार्ड 83 से विजयी सीमा चौधरी का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के वार्ड से चुनाव लड़ने वाली सीमा ने कांग्रेस की सुनीता शर्मा को 1746 वोटों से हराया है। वे पूर्व पार्षद धीरेन्द्र चौधरी की पत्नी हैं। बड़े अंतर से जीत और राजनीतिक पृष्ठभूमि के चलते उन्हें संभावित दावेदारों में गिना जा रहा है।

अनुसुईया के अनुभव की चर्चा

वार्ड 98 से जीतीं अनुसुईया गोस्वामी भी महापौर पद की चर्चाओं में हैं। भाजपा की पूर्व प्रदेश मंत्री गोस्वामी ने कांग्रेस के आयुष पारेता को 393 वोटों से हराया। संगठन में काम करने का अनुभव उनकी दावेदारी के पक्ष में माना जा रहा है।

वहीं वार्ड 64 से प्रतिभा सुमन और वार्ड 84 से प्रमिला वर्मा के नाम भी सामने आ रहे हैं। इन नामों के बीच पार्टी किसे आगे करेगी, इसे लेकर पार्षदों और कार्यकर्ताओं में उत्सुकता है।

नेतृत्व के फैसले का इंतजार

भाजपा के सामने अब बहुमत को महापौर चुनाव में एकजुट रखने और सदन का नेतृत्व तय करने की चुनौती है। चयन में संगठन का अनुभव, स्थानीय राजनीतिक समीकरण और पार्षदों के बीच स्वीकार्यता जैसे पहलुओं की भूमिका हो सकती है। पार्टी किसी अनुभवी चेहरे पर भरोसा जताएगी या नए नाम को मौका देगी, यह अंतिम घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा।

ADVERTISEMENT
लेखक

विशेष संवाददाता

नागरिक अभिव्यक्ति विशेष डिजिटल रिपोर्टर एवं विश्लेषक।

comment पाठकों की प्रतिक्रिया (Comments)

अपनी राय दर्ज करें: