कोटा/28 सितंबर 2026। जैन दर्शन में क्षमा केवल किसी दूसरे को माफ करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के भीतर के क्रोध और अहंकार को समाप्त कर आत्मा को शांत एवं निर्मल बनाने की साधना है। यह विचार ज्ञानोदय सिद्धांत महाविद्यालय, भोपाल से दशलक्षण महापर्व के अवसर पर कोटा आए पंडित शुभभ शास्त्री ने व्यक्त किए। वे जैन जनउपयोगी भवन में आयोजित मुमुक्षु समाज के सामूहिक क्षमावाणी महापर्व में प्रवचन दे रहे थे।
पंडित शुभभ शास्त्री ने कहा कि क्षमा का भाव मनुष्य के भीतर शांति, संयम और आत्मिक निर्मलता उत्पन्न करता है। जैन धर्म में क्षमावाणी आत्मचिंतन और आत्मशुद्धि का महत्वपूर्ण अवसर है। इस अवसर पर रामपुरा, इंद्र विहार सहित समस्त मुमुक्षु समाज के लोगों ने वर्षभर में जाने-अनजाने हुई गलतियों के लिए एक-दूसरे से हाथ जोड़कर क्षमा मांगी और उत्तम क्षमा कहा।
श्री दिगंबर जैन मुमुक्षु मंडल, कोटा के महामंत्री निकलंक शास्त्री ने बताया कि कार्यक्रम में इंद्र विहार पाठशाला के नन्हे बालक-बालिकाओं ने मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम में सकल दिगंबर जैन समाज के महामंत्री पदम बड़ला, पूर्व मंत्री विनोद टोरड़ी, कार्याध्यक्ष जेके जैन, खंडेलवाल सरावगी समाज के अध्यक्ष राकेश पाटोदी तथा कोटा व्यापार महासंघ के अध्यक्ष एवं रामपुरा वार्ड पार्षद क्रांति जैन अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
आमंत्रित अतिथियों का चंदन का तिलक लगाकर और दुपट्टा पहनाकर स्वागत किया गया। महामंत्री पदम बड़ला ने आयोजन के लिए समाजबंधुओं को बधाई दी और सभी से क्षमा मांगी।
इस अवसर पर मुमुक्षु मंडल कोटा के वर्तमान अध्यक्ष महेंद्र जैन ‘भिंडी वाले’, पूर्व अध्यक्ष ज्ञानचंद जैन, विजय जैन, संरक्षक विमल दुगेरिया और वीरेंद्र हरसौरा सहित बड़ी संख्या में समाजबंधु मौजूद रहे।
