कोटा।
दी इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया), कोटा लोकल सेंटर की ओर से झालावाड़ रोड स्थित इंजीनियर्स भवन में राष्ट्रीय अभियंता दिवस मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कोटा लोकल सेंटर के चेयरमैन डॉ. डी.के. जैन ने की। मुख्य अतिथि आरटीयू के कुलपति डॉ. निमित चौधरी तथा मुख्य वक्ता डॉ. मनीष चतुर्वेदी रहे।
कार्यक्रम का विषय ‘इंजीनियरिंग एक्सीलेंस फॉर अ सस्टेनेबल एंड टेक्नोलॉजिकल सोवरेन इंडिया’ रहा। कार्यक्रम की शुरुआत भारत रत्न डॉ. एम. विश्वेश्वरैया के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुई।
मुख्य वक्ता डॉ. मनीष चतुर्वेदी ने तकनीकी आत्मनिर्भरता के लिए नवाचार, अनुसंधान, स्वदेशी तकनीक और कौशल विकास को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि बदलती तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप इंजीनियरिंग क्षेत्र में लगातार अनुसंधान और नए प्रयोगों को बढ़ावा देना जरूरी है।
मुख्य अतिथि डॉ. निमित चौधरी ने इंजीनियरिंग शिक्षा को उद्योग, अनुसंधान और समाज की जरूरतों से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि तकनीकी शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार तक सीमित न रहकर सामाजिक और औद्योगिक समस्याओं के समाधान में भी योगदान देना होना चाहिए।
चार इंजीनियरों को एमिनेंट इंजीनियर अवॉर्ड
कार्यक्रम के दौरान एन.एस. वालिया, एस.यू. पुराणिक, भगवान सहाय गुप्ता और दासरी सुब्बा राव को एमिनेंट इंजीनियर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। वहीं अमृत शर्मा को यंग इंजीनियर अवॉर्ड प्रदान किया गया।
इस अवसर पर मुनेन्द्र कुमार प्रताप ने ‘इनोवेटिव आइडियाज’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने तकनीकी क्षेत्र में नए विचारों और नवाचार की भूमिका पर चर्चा की।
कार्यक्रम में जल संसाधन विभाग, भारतीय रेल, राजस्थान परमाणु बिजलीघर रावतभाटा, कोटा सुपर थर्मल पावर सहित विभिन्न सरकारी एवं तकनीकी संस्थानों से जुड़े इंजीनियर और वैज्ञानिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन मानद सचिव डॉ. अन्नपूर्णा भार्गव ने किया। आयोजन के दौरान इंजीनियरिंग क्षेत्र में तकनीकी उत्कृष्टता, अनुसंधान, नवाचार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।
