नागरिक अभिव्यक्ति । कोटा
कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सीजेरियन प्रसव के बाद 40 वर्षीय रेशमा की शुक्रवार देर रात मौत हो गई। प्रसव के बाद तबीयत बिगड़ने पर परिजन उन्हें निजी अस्पताल भी लेकर गए थे, लेकिन हालत में सुधार नहीं होने पर वापस न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल लाया गया। यहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल में इलाज के दौरान लापरवाही और दुर्व्यवहार के आरोप लगाते हुए महावीर नगर थाने में शिकायत दी है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार कार्मिकों पर कार्रवाई और परिवार को मुआवजा देने की मांग की है।
परिजनों का आरोप है कि सामान्य वार्ड में ड्रिप चढ़ाने के दौरान इंजेक्शन दिए जाने के बाद रेशमा की तबीयत बिगड़ने लगी। उनका शरीर नीला-पीला पड़ने लगा, लेकिन स्टाफ ने समय पर उचित उपचार नहीं दिया। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि दूसरे चिकित्सक को दिखाने के लिए मेडिकल रिपोर्ट मांगी गई, लेकिन उन्हें रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई। हालांकि, किस इंजेक्शन के बाद तबीयत बिगड़ी और उसका महिला की मौत से कोई संबंध था या नहीं, यह जांच का विषय है।
13 अक्टूबर को हुई थीं भर्ती, 14 को सीजेरियन
अस्पताल प्रशासन के अनुसार छावनी क्षेत्र निवासी रेशमा को 13 अक्टूबर को 36 सप्ताह तीन दिन के गर्भ और पेट दर्द की शिकायत पर भर्ती कराया गया था। पहले तीन प्रसव भी सीजेरियन से होने तथा पुराने ऑपरेशन के टांकों वाली जगह पर तेज दर्द और संवेदनशीलता को देखते हुए 14 अक्टूबर की सुबह आपातकालीन सीजेरियन किया गया। सुबह 8:41 बजे उन्होंने बच्चे को जन्म दिया। यह उनका चौथा प्रसव था।
अस्पताल के नए अधीक्षक डॉ. आशुतोष शर्मा के अनुसार प्रसव के बाद रेशमा को हल्का रक्तस्राव हुआ और अचानक रक्तचाप तथा ऑक्सीजन सेचुरेशन गिरने लगा। दिल की धड़कन भी धीमी हो गई। चिकित्सकों को रक्त में थक्का बनने की आशंका हुई, जिसके बाद उन्हें सर्जिकल आईसीयू में शिफ्ट किया गया। दवाओं से रक्तचाप नियंत्रित करने का प्रयास किया गया। यूरिन आउटपुट कम होने पर नेफ्रोलॉजी और एनेस्थीसिया टीम को भी उपचार में शामिल किया गया।
अस्पताल प्रशासन ने मामले को पहले से जटिल बताते हुए कहा कि परिजनों द्वारा बीच में मरीज को निजी अस्पताल ले जाने से उपचार की निरंतरता प्रभावित हुई। दूसरी ओर, परिजनों का कहना है कि हालत बिगड़ने पर वे रेशमा को निजी अस्पताल ले गए थे और वहां से सलाह मिलने पर दोबारा सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचे। शुक्रवार शाम उन्हें सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में भर्ती किया गया, जहां देर रात उनकी मौत हो गई।
नवजात सहित चार बच्चों के सिर से उठा मां का साया
रेशमा के निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उनके पति मकसूद खान ड्राइवर हैं। मृतका की पहले से तीन बेटियां हैं, जिनकी उम्र 19, 17 और 13 वर्ष बताई गई है। चौथे बच्चे के रूप में नवजात के जन्म के दो दिन के भीतर ही मां की मौत हो गई। परिवार ने अस्पताल प्रशासन से जवाबदेही तय करने और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। परिजनों ने बड़ी बेटी को संविदा पर सरकारी नौकरी देने की मांग भी उठाई है।
मई की घटना के बाद फिर उठे सवाल
न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रसव के बाद गंभीर जटिलताओं का मामला इससे पहले मई 2026 में भी सामने आया था। उस समय सीजेरियन प्रसव के बाद कई प्रसूताओं की किडनी प्रभावित होने और पांच महिलाओं की मौत की सूचना सामने आई थी। अब रेशमा की मौत के बाद प्रसवोत्तर निगरानी, जटिल स्थिति में तत्काल उपचार और परिजनों को समय पर जानकारी देने जैसे मुद्दे फिर चर्चा में हैं। रेशमा की मौत के वास्तविक कारण और इलाज के दौरान हुई घटनाओं की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
