कोटा |
कोटा जिले की सबसे चर्चित पंचायत समिति लाडपुरा में लंबे समय से चल रहा कानूनी और प्रशासनिक गतिरोध समाप्त हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लाडपुरा प्रधान नईमुद्दीन गुड्डू ने राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिलने के बाद शुक्रवार को तीसरी बार प्रधान पद का कार्यभार संभाल लिया है। इस पुनर्बहाली के साथ ही लाडपुरा पंचायत समिति में उनके आधिकारिक कामकाज और प्रशासनिक निर्णयों का रास्ता फिर से साफ हो गया है। उनकी इस वापसी से स्थानीय कांग्रेस खेमे और समर्थकों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है।
पूरा घटनाक्रम: निलंबन से तीसरी बार ताजपोशी तक का सियासी व कानूनी सफर
लाडपुरा प्रधान पद को लेकर सरकार और नईमुद्दीन गुड्डू के बीच खींचतान पिछले लंबे समय से लगातार चर्चा में रही है:
दिनांक / अवधि
घटनाक्रम का विवरण
28 फरवरी 2025
राज्य सरकार के पंचायती राज विभाग ने 12 ग्राम पंचायतों में सफाई ठेकों में वित्तीय अनियमितता के आरोप लगाकर गुड्डू को निलंबित किया।
अगस्त 2025 (प्रथम पखवाड़ा)
निलंबन के खिलाफ राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका; अदालत ने लंबे निलंबन पर आपत्ति जताते हुए कार्यभार सौंपने के निर्देश दिए।
22 अगस्त 2025
हाईकोर्ट के आदेश पर नईमुद्दीन गुड्डू ने दूसरी बार पदभार ग्रहण किया; कलेक्ट्रेट सर्किल पर कांग्रेस नेताओं का बड़ा शक्ति प्रदर्शन हुआ।
अगस्त 2025 (6 दिन बाद)
पंचायती राज विभाग के डिप्टी सेक्रेटरी इंद्रजीत सिंह ने नया आदेश जारी कर धारा 38(4) के तहत गुड्डू को फिर निलंबित किया।
ताजा घटनाक्रम
हाईकोर्ट के सख्त रुख और नए अदालती आदेश के बाद नईमुद्दीन गुड्डू ने तीसरी बार विधिवत पदभार संभाल लिया।
क्या था निलंबन का मूल विवाद?
पूरे विवाद की शुरुआत 28 फरवरी 2025 को हुई थी, जब राज्य के पंचायती राज विभाग ने एक आदेश जारी कर प्रधान नईमुद्दीन गुड्डू को पद से निलंबित कर दिया था।
आरोप: लाडपुरा पंचायत समिति की 12 ग्राम पंचायतों में डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण व सफाई व्यवस्था के ठेकों में कथित वित्तीय अनियमितताओं और नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया था।
गुड्डू का पक्ष: गुड्डू ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए राजस्थान हाईकोर्ट की शरण ली थी।
अदालत का दखल: हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए बिना ठोस निष्कर्ष के किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधि को लंबे समय तक निलंबित रखने पर कड़ी आपत्ति जताई थी और उन्हें पदभार ग्रहण कराने का आदेश दिया था।
6 दिन में दोबारा निलंबन और फिर कोर्ट से राहत
अगस्त 2025 में जब हाईकोर्ट के दखल पर 22 अगस्त को गुड्डू ने पदभार संभाला था, तब कोटा जिला कांग्रेस अध्यक्ष रवींद्र त्यागी सहित पार्टी के तमाम दिग्गज नेता और सैकड़ों कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट सर्किल पर उनके समर्थन में जुटे थे।
हालाँकि, यह राहत महज 6 दिन ही टिक सकी। पंचायती राज विभाग के डिप्टी सेक्रेटरी इंद्रजीत सिंह ने जांच रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया दोष सिद्ध होने का हवाला देते हुए राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 38(4) के तहत नया आदेश जारी कर उन्हें पुनः निलंबित कर दिया था। इस आदेश के कारण गुड्डू पंचायत समिति की किसी भी आधिकारिक बैठक या गतिविधि में हिस्सा नहीं ले पा रहे थे। इसके खिलाफ गुड्डू ने फिर से अदालत का दरवाजा खटखटाया, जहाँ से अंततः उन्हें दोबारा बहाली का आदेश प्राप्त हुआ।
लाडपुरा की राजनीति में गुड्डू परिवार का दबदबा
नईमुद्दीन गुड्डू सिर्फ पंचायती राज के जनप्रतिनिधि ही नहीं, बल्कि लाडपुरा विधानसभा क्षेत्र के सबसे कद्दावर सियासी चेहरों में गिने जाते हैं। गुड्डू और उनका परिवार पिछले करीब दो दशकों से इस क्षेत्र में कांग्रेस पार्टी का मुख्य आधार रहा है:
विधानसभा चुनाव 2008: कांग्रेस ने नईमुद्दीन गुड्डू को लाडपुरा से अपना प्रत्याशी बनाया।
विधानसभा चुनाव 2013: पार्टी ने दोबारा गुड्डू पर भरोसा जताया और टिकट दिया।
विधानसभा चुनाव 2018: गुड्डू परिवार से उनकी धर्मपत्नी गुलनाज गुड्डू ने कांग्रेस के सिंबल पर विधानसभा चुनाव लड़ा।
विधानसभा चुनाव 2023: कांग्रेस ने एक बार फिर नईमुद्दीन गुड्डू को लाडपुरा विधानसभा से चुनावी मैदान में उतारा।
स्थानीय राजनीति में बढ़ा सियासी पारा
लगातार दो बार निलंबन, प्रशासनिक जांच और हाईकोर्ट की कानूनी चौखट से जीतकर तीसरी बार प्रधान की कुर्सी पर बैठने की इस घटना ने हाड़ौती की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंचायत समिति चुनावों और आगामी स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से गुड्डू की यह बहाली कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए एक बड़ा मनोवैज्ञानिक मनोबल बढ़ाने वाली साबित होगी।
