कोटा। जिले के नगरीय निकाय चुनाव 2026 के अंतिम नतीजों में भाजपा ने कोटा नगर निगम सहित तीन नगर पालिकाओं में स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। कोटा निगम के अलावा सांगोद, रामगंजमंडी और सुल्तानपुर में भाजपा बोर्ड बनाने की स्थिति में है। वहीं, सुकेत नगर पालिका में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन बहुमत का आंकड़ा किसी भी दल को नहीं मिला है।
नतीजों के बाद अब महापौर और पालिका अध्यक्षों के चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। कोटा नगर निगम का महापौर पद ओबीसी महिला के लिए आरक्षित है। ऐसे में भाजपा में इस वर्ग की निर्वाचित महिला पार्षदों में से प्रत्याशी के चयन पर निगाहें टिकी हैं।
कोटा निगम में बहुमत से छह सीटें अधिक
कोटा नगर निगम के 100 वार्डों में भाजपा ने 57 सीटें जीती हैं। कांग्रेस को 39 और निर्दलीयों को चार सीटें मिली हैं। निगम में बहुमत के लिए 51 पार्षदों की जरूरत है। भाजपा ने इस आंकड़े से छह सीटें अधिक हासिल की हैं। पुनर्मतदान के नतीजों के साथ निगम के सभी वार्डों की स्थिति स्पष्ट हो गई है।
सांगोद और रामगंजमंडी में भी भाजपा मजबूत
सांगोद नगर पालिका के 35 वार्डों में भाजपा ने 20 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया। कांग्रेस को 11 सीटें मिलीं, जबकि चार वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी विजयी रहे।
रामगंजमंडी नगर पालिका के 40 वार्डों में भाजपा ने 24 सीटों पर जीत दर्ज की। कांग्रेस को 14 और निर्दलीयों को दो सीटें मिलीं। यहां चुनाव मैदान में कुल 119 प्रत्याशी थे। पालिका अध्यक्ष का पद सामान्य वर्ग के लिए निर्धारित है।
सुल्तानपुर में बहुमत के आंकड़े पर भाजपा
सुल्तानपुर नगर पालिका के 25 वार्डों में भाजपा को 13 सीटें मिली हैं। कांग्रेस ने 11 और एक निर्दलीय प्रत्याशी ने जीत हासिल की है। भाजपा ने यहां बहुमत के लिए जरूरी 13 सीटों का आंकड़ा प्राप्त कर लिया है। पालिका अध्यक्ष का पद अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित है।
नवगठित सुकेत नगर पालिका के 25 वार्डों में पुनर्मतदान के बाद कांग्रेस की सीटें 11 हो गई हैं। भाजपा के पास 10 सीटें हैं, जबकि चार सीटों पर निर्दलीय जीते हैं। बहुमत के लिए 13 पार्षदों का समर्थन जरूरी है। कांग्रेस इस आंकड़े से दो और भाजपा तीन सीट दूर है।
ऐसे में सुकेत में बोर्ड गठन के लिए निर्दलीयों का समर्थन अहम होगा। यहां अध्यक्ष पद ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित है। सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद कांग्रेस को अपना अध्यक्ष बनाने के लिए अतिरिक्त समर्थन जुटाना होगा।
