नागरिक अभिव्यक्ति @ कोटा
कोटा। पंचायत चुनाव के पहले चरण में कोटा जिले की चार पंचायत समितियों की ग्राम पंचायतों में हार-जीत के कई दिलचस्प नतीजे सामने आए। कहीं प्रत्याशियों ने हजार से अधिक वोटों के अंतर से जीत दर्ज की, तो कहीं महज दो वोटों ने सरपंच की कुर्सी का फैसला कर दिया। शनिवार को मतदान के बाद शुरू हुई मतगणना देर रात तक चली। लाडपुरा पंचायत समिति की मंडाना और सांगोद पंचायत समिति की धुलेट ग्राम पंचायत में मतगणना रविवार दोपहर तक जारी रही। दोनों जगह दोपहर 12 बजे के बाद परिणाम घोषित किए गए। इन चुनावों में राजनीतिक परिवारों की प्रतिष्ठा भी दांव पर रही। सांगोद की कुंदनपुर पंचायत से पूर्व मंत्री भरत सिंह के बेटे गंगा सिंह सरपंच निर्वाचित हुए, जबकि तेहरोली पंचायत में निवर्तमान जिला प्रमुख मुकेश मेघवाल के बेटे कपिल मेघवाल को हार का सामना करना पड़ा।
जिले की 163 ग्राम पंचायतों में से 162 में मतदान के बाद परिणाम सामने आए। लाडपुरा पंचायत समिति की गिरधरपुरा ग्राम पंचायत में सरपंच और वार्ड पंच निर्विरोध चुने जाने के कारण मतदान नहीं हुआ।
मंडाना में दो वोट से जीत, मतगणना पर हुआ विवाद
लाडपुरा पंचायत समिति की मंडाना ग्राम पंचायत में हार-जीत का अंतर सबसे कम रहा। यहां सरपंच पद के लिए दयाराम ने नवल किशोर को केवल दो वोटों से हराया। दयाराम को 1301 और नवल किशोर को 1299 मत मिले। मतगणना के दौरान परिणाम को लेकर विवाद हो गया। एक पक्ष ने दोबारा मतगणना कराने की मांग की। इसके बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण मतगणना केंद्र के बाहर एकत्र हो गए और नारेबाजी करने लगे। स्थिति को देखते हुए पुलिस का जाब्ता मौके पर तैनात रहा। विवाद और पुनर्मतगणना की मांग के बीच परिणाम घोषित होने में देरी हुई। रविवार दोपहर 12 बजे के बाद दयाराम की जीत की घोषणा की गई।
गेंता में दिग्विजय सिंह ने दर्ज की सबसे बड़ी जीत
चारों पंचायत समितियों के चुनाव परिणामों में सबसे बड़े अंतर की जीत इटावा पंचायत समिति की गेंता ग्राम पंचायत में दर्ज हुई। यहां दिग्विजय सिंह ने 1361 वोटों के अंतर से जीत हासिल कर सरपंच पद पर कब्जा जमाया। दूसरी ओर इटावा की ही ख्यावदा ग्राम पंचायत में मुकाबला बेहद करीबी रहा। यहां ग्यारसी लाल ने केवल आठ वोटों से जीत दर्ज की।
पूर्व मंत्री के बेटे गंगा सिंह 778 वोटों से जीते
सांगोद पंचायत समिति की कुंदनपुर ग्राम पंचायत में पूर्व मंत्री भरत सिंह के बेटे गंगा सिंह ने सरपंच पद का चुनाव जीत लिया। गंगा सिंह को 1245 वोट मिले, जबकि उनकी प्रतिद्वंद्वी सुशीला नागर को 467 मत प्राप्त हुए। इस तरह गंगा सिंह ने 778 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। चुनाव परिणाम के साथ ही क्षेत्र में राजनीतिक परिवारों की भूमिका भी चर्चा में रही।
जिला प्रमुख के बेटे कपिल मेघवाल तीसरे स्थान पर
सांगोद पंचायत समिति की तेहरोली ग्राम पंचायत में निवर्तमान जिला प्रमुख मुकेश मेघवाल के बेटे कपिल मेघवाल सरपंच पद का चुनाव हार गए। कपिल को 387 वोट मिले और वह तीसरे स्थान पर रहे। इस परिणाम ने क्षेत्र में राजनीतिक प्रभाव और स्थानीय मतदाताओं के रुझान को लेकर चर्चाओं को जगह दी।
बड़ोंद में अंशु सुवालका को 908 वोटों की बढ़त
सुल्तानपुर पंचायत समिति की बड़ोंद ग्राम पंचायत में अंशु सुवालका ने बड़ी जीत दर्ज की। उन्हें 1592 वोट मिले, जबकि दूसरे स्थान पर रहीं सीमा को 684 मत प्राप्त हुए। अंशु ने 908 वोटों के अंतर से जीत हासिल की। वहीं अमरपुरा ग्राम पंचायत में शबाना और चंद्रकला के बीच बेहद करीबी मुकाबला हुआ। शबाना को 459 और चंद्रकला को 455 वोट मिले। शबाना ने महज चार मतों से सरपंच पद का चुनाव जीत लिया।
सुल्तानपुर क्षेत्र में राजनीतिक रूप से सक्रिय परिवारों के सदस्य भी चुनाव मैदान में रहे। दीगोद ग्राम पंचायत में भाजपा देहात जिला उपाध्यक्ष मनीष शर्मा सरपंच निर्वाचित हुए। नवगठित ग्राम पंचायत बाक्या में आईएएस अधिकारी के भाई हरिओम मीणा की पत्नी अनीता मीणा ने सरपंच पद पर जीत दर्ज की।
बपावर में मानसिंह की सबसे बड़ी जीत, सावनभादों में सात वोट का अंतर
सांगोद पंचायत समिति की बपावर ग्राम पंचायत में मानसिंह ने 1237 वोटों के अंतर से जीत हासिल की। इसी पंचायत समिति की सावनभादों ग्राम पंचायत में मुकाबला काफी नजदीकी रहा। यहां महेंद्र नागर ने केवल सात वोटों से जीत दर्ज की।
अलरिया जागीर में प्रसन्न बाई 1069 वोटों से जीतीं
लाडपुरा पंचायत समिति की अलरिया जागीर ग्राम पंचायत में प्रसन्न बाई ने 1069 वोटों के अंतर से जीत हासिल की। वहीं प्रहलादपुरा ग्राम पंचायत में गुड्डी बाई ने महज 13 वोटों से सरपंच पद का चुनाव अपने नाम किया।
पहले चरण के इन नतीजों में बड़े अंतर की जीत के साथ बेहद करीबी मुकाबले भी देखने को मिले। गेंता में 1361 वोटों की बढ़त से लेकर मंडाना में केवल दो मतों के अंतर तक के परिणामों ने ग्राम पंचायतों में चुनावी प्रतिस्पर्धा की अलग-अलग तस्वीर सामने रखी। राजनीतिक परिवारों के सदस्यों की जीत और हार ने भी स्थानीय राजनीति में इन परिणामों को चर्चा का विषय बना दिया।
