कोटा। थार क्षेत्र के भूजल में फ्लोराइड और स्वास्थ्य जोखिम, शेखावाटी के बदलते कृषि स्वरूप तथा जयपुर में वर्षाजल प्रबंधन जैसे विषय राजस्थान भूगोल परिषद के 52वें राष्ट्रीय अधिवेशन के दूसरे दिन चर्चा में रहे। शुक्रवार को कोटा विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग में आयोजित तकनीकी सत्रों में 25 से अधिक शोधपत्र प्रस्तुत किए गए।
देशभर के विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों से आए भूगोलवेत्ताओं, प्राध्यापकों और शोधार्थियों ने पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन, जल संसाधन, कृषि, शहरी विकास, आपदा प्रबंधन और सतत विकास पर अपने अध्ययन रखे। उदयपुर के राजमार्ग कॉरिडोर में आर्थिक गतिविधियों के भौगोलिक विश्लेषण और हरियाणा की कृषि संरचना में बदलाव पर भी शोध प्रस्तुत हुए।
कुलगुरु प्रो. बी.पी. सारस्वत ने कहा कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में भूगोल की महत्वपूर्ण भूमिका है। सामाजिक, आर्थिक, पर्यावरणीय और क्षेत्रीय विकास की चुनौतियों को समझने तथा उनके समाधान तलाशने में भौगोलिक दृष्टिकोण उपयोगी है।
अधिवेशन में यंग जियोग्राफर अवार्ड के लिए विवेक राज सिंह प्रथम, अमित कुमार यादव द्वितीय और अंकिता कुमावत तृतीय स्थान पर चयनित हुए। पोस्टर प्रस्तुतीकरण में प्रियंशु, हिमालय पांडेय और हर्षिल आदित्य पाठक विजेता रहे। उत्कृष्ट शोधपत्र और पोस्टर प्रस्तुत करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया।
