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माता-पिता ही संसार: रामपुरा की झांकी में शिव-पार्वती की परिक्रमा करते गणपति

रिमोट से संचालित झांकी में पौराणिक कथा का प्रदर्शन, देसी मिट्टी की प्रतिमाओं से पर्यावरण संरक्षण का संदेश

संवाददाता
विशेष संवाददाता विशेष रिपोर्टर
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माता-पिता ही संसार: रामपुरा की झांकी में शिव-पार्वती की परिक्रमा करते गणपति
माता-पिता ही संसार: रामपुरा की झांकी में शिव-पार्वती की परिक्रमा करते गणपति
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कोटा। हाथ जोड़े भगवान गणपति, सामने विराजमान शिव-पार्वती और रिमोट के संचालन के साथ माता-पिता की परिक्रमा करते बप्पा। रामपुरा क्षेत्र में गणेशोत्सव पर तैयार स्वचालित झांकी में इस बार भक्ति के साथ तकनीक का संगम देखने को मिल रहा है। झांकी के माध्यम से संदेश दिया गया है कि माता-पिता का सम्मान और उनकी सेवा जीवन का महत्वपूर्ण संस्कार है।

समाजसेवी डॉ. दुर्गा शंकर सैनी की पहल पर तैयार इस झांकी में रविवार को विधि-विधान से गणपति परिवार की स्थापना की गई। पूजा-अर्चना के दौरान स्थानीय लोग मौजूद रहे। ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजी के साथ झांकी का स्वागत किया गया। आयोजकों के अनुसार, झांकी अनंत चतुर्दशी पर भी प्रस्तुत की जाएगी।

पौराणिक प्रसंग को दिया गतिशील स्वरूप

झांकी का आधार भगवान गणपति और कार्तिकेय के बीच पृथ्वी की परिक्रमा से जुड़ा पौराणिक प्रसंग है। कथा के अनुसार, दोनों भाइयों को पृथ्वी की परिक्रमा कर वापस आने की चुनौती मिली थी। भगवान कार्तिकेय अपने वाहन मोर पर सवार होकर परिक्रमा के लिए निकल पड़े। वहीं, गणपति ने अपने माता-पिता शिव-पार्वती की परिक्रमा की और उन्हें ही अपना संसार व ब्रह्मांड बताया।

इसी प्रसंग को झांकी में स्वचालित यंत्रों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है। रिमोट से संचालन करने पर गणपति की प्रतिमा हाथ जोड़े हुए शिव-पार्वती के चारों ओर परिक्रमा करती दिखाई देती है।

आयोजकों का दावा—एआई तकनीक का भी प्रयोग

डॉ. सैनी ने बताया कि झांकी तैयार करने में स्वचालित तकनीक के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भी प्रयोग किया गया है। हालांकि, एआई की विशिष्ट भूमिका के बारे में तकनीकी विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया है। उन्होंने इसे देश की पहली ऐसी झांकी होने का दावा किया, जिसमें गणपति की परिक्रमा के प्रसंग और माता-पिता के सम्मान का संदेश इस स्वरूप में प्रस्तुत किया गया है। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

डॉ. सैनी के अनुसार, झांकी का उद्देश्य विशेष रूप से युवाओं को माता-पिता के प्रति आदर और उनके मार्गदर्शन का महत्व समझाना है। पौराणिक कथा को गतिशील रूप में दिखाकर इस संदेश को दर्शकों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है।

देसी मिट्टी से तैयार किया गणपति परिवार

झांकी में पर्यावरण संरक्षण का भी ध्यान रखा गया है। भगवान शिव, माता पार्वती और गणपति की प्रतिमाएं देसी मिट्टी से तैयार की गई हैं। मूर्तिकार पंकज भास्कर ने प्रतिमाओं का निर्माण किया है। संभव ग्राफिक्स ने स्वचालित यंत्र संचालन का कार्य संभाला।

निर्माण में स्थानीय सहयोगियों की भागीदारी

झांकी तैयार करने में आनंद हजारी, नरेंद्र नागर, जितेंद्र सुमन, सोनू बना, राकेश सिंह, घनश्याम बागड़ी, तुषार सुमन, बिट्टू सेन, मनीष यादव, कन्हैया, कमलेश, डॉ. राजेश सामर, डॉ. गिर्राज राठौर, गौरव तंवर, सौरभ तंवर, राजेंद्र, संजीव जैन और मुकेश मालव सहित अन्य सहयोगियों ने योगदान दिया।

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लेखक

विशेष संवाददाता

नागरिक अभिव्यक्ति विशेष डिजिटल रिपोर्टर एवं विश्लेषक।

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