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जन्मजात बधिरता से जूझ रहा जीवांशु अब सुन और बोल सकेगा, आरबीएसके में निशुल्क कॉक्लियर इंप्लांट सर्जरी से बदला जीवन

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विशेष संवाददाता विशेष रिपोर्टर
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जन्मजात बधिरता से जूझ रहा जीवांशु अब सुन और बोल सकेगा, आरबीएसके में निशुल्क कॉक्लियर इंप्लांट सर्जरी से बदला जीवन
जन्मजात बधिरता से जूझ रहा जीवांशु अब सुन और बोल सकेगा, आरबीएसके में निशुल्क कॉक्लियर इंप्लांट सर्जरी से बदला जीवन
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कोटा। जन्म से ही सुनने में अक्षम साढ़े तीन साल के बालक जीवांशु के जीवन में अब नई उम्मीद जगी है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के तहत जयपुर के आरयूएचएस हॉस्पिटल में 30 सितंबर को जीवांशु की निशुल्क कॉक्लियर इंप्लांट सर्जरी की गई। अब उसे एक साल तक स्पीच थेरेपी दी जाएगी, ताकि वह धीरे-धीरे बोलना सीख सके।

आंगनबाड़ी केंद्र पर स्क्रीनिंग में हुई बीमारी की पहचान

सीएमएचओ डॉ. नरेंद्र नागर ने बताया कि आरबीएसके अर्बन कोटा की मोबाइल हेल्थ टीम ने इंदिरा गांधी नगर-1 स्थित आंगनबाड़ी केंद्र पर बच्चों की स्क्रीनिंग की थी। टीम में डॉ. अंजू शारदा, कृष्णा मीणा और ऋषि शर्मा शामिल थे।

स्क्रीनिंग के दौरान टीम ने जीवांशु में कंजेनाइटल डीफनेस (Congenital Deafness) यानी जन्मजात बधिरता की पहचान की। इसके बाद आवश्यक जांच और विशेषज्ञ उपचार के लिए उसे रेफर किया गया।

मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं पिता

जीवांशु के पिता विनोद मीणा मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। उन्होंने बताया कि जीवांशु का जन्म 18 फरवरी 2023 को हुआ था। जन्म के बाद जब बेटे में सुनने की समस्या का पता चला तो परिवार के लिए यह बेहद कठिन समय था।

आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण महंगे इलाज की चिंता भी परिवार को थी। ऐसे में आरबीएसके कार्यक्रम के तहत निशुल्क कॉक्लियर इंप्लांट सर्जरी होने से परिवार को बड़ी राहत मिली है।

एक साल तक दी जाएगी स्पीच थेरेपी

कॉक्लियर इंप्लांट सर्जरी के बाद जीवांशु को करीब एक साल तक स्पीच थेरेपी दी जाएगी। इसका उद्देश्य उसे सुनने और बोलने की क्षमता विकसित करने में मदद करना है। परिवार को उम्मीद है कि उपचार और नियमित थेरेपी के बाद जीवांशु भी अन्य बच्चों की तरह सामान्य रूप से सुन और बोल सकेगा।

आरबीएसके के तहत अब तक 33 बच्चों की निशुल्क सर्जरी

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, आरबीएसके कार्यक्रम के तहत अब तक 33 बच्चों की निशुल्क सर्जरी कराई जा चुकी है। कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों में जन्मजात और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की समय पर पहचान कर उन्हें आवश्यक उपचार के लिए रेफर किया जा रहा है।

जीवांशु की सर्जरी भी इसी स्वास्थ्य सेवा का हिस्सा है, जिसने आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के लिए महंगे उपचार का रास्ता आसान किया है।

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लेखक

विशेष संवाददाता

नागरिक अभिव्यक्ति विशेष डिजिटल रिपोर्टर एवं विश्लेषक।

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