कोटा।
भगवान श्री राधारमण जी की असीम कृपा एवं श्रद्धालुओं के सहयोग से श्री राधा रमण भागवत आयोजन समिति कोटा की ओर से श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह का भव्य आयोजन मेडिकल कॉलेज ग्राउंड पर किया जा रहा है, इस दौरान यह विचार प्रसिद्ध कथा वाचक श्री पं. रवि जी गौतम, कंदाफल वालो ने शुक्रवार को श्रद्धालुओं को भगवान के प्रति समर्पण, श्रद्धा और विश्वास का महत्व समझाते हुए कहा कि मनुष्य भगवान को श्रद्धा से थोड़ा भी देता है तो भगवान उसे कई गुना करके वापस लौटाते हैं। कार्यक्रम में उर्जा मंत्री हीरालाल नागर, एलन के गोविंद जी माहेश्वरी, पूर्व देहात भाजपा जिला महामंत्री जयवीर सिंह सहित अन्य अतिथियों ने कथा में सहभागिता की। प्रवचन के दौरान महाराज जी ने कहा कि मनुष्य का धन भी उसी को अपना लगता है, जिसे वह दिल से चाहता है। जिस व्यक्ति या वस्तु से प्रेम होता है, उसके लिए खर्च किया गया धन बोझ नहीं लगता। इसी प्रकार जब भक्त के मन में भगवान के प्रति सच्ची श्रद्धा और प्रेम जागता है तो भगवान को अर्पित किया गया छोटा-सा अंश भी बहुत बड़ा बन जाता है।
महाराज जी ने द्रौपदी के प्रसंग का उदाहरण देते हुए कहा कि द्रौपदी ने भगवान श्रीकृष्ण को चीर का छोटा-सा टुकड़ा अर्पित किया था, लेकिन भगवान ने संकट के समय उसी भावना का कई गुना प्रतिफल देते हुए द्रौपदी की लाज बचाई। उन्होंने कहा कि यह प्रसंग बताता है कि भगवान भक्त के दिए हुए की मात्रा नहीं देखते, बल्कि उसके पीछे छिपी भावना को देखते हैं। सच्ची श्रद्धा से किया गया छोटा-सा त्याग भी भगवान के लिए अमूल्य होता है। आयोजन समिति के अध्यक्ष हरिओम गौतम ने बताया कि श्रद्धालुओं की भारी भीड़ कथा स्थल पर पहुंच रही है, दूर दराज से भी लोग हजारों की संख्या में आ रहे हैं। कथा पांडाल पूरी तरह श्रद्धालुओं से खचा-खच भरा रहता है, भक्ति गीतों पर श्रद्धालू झूम उठते हैं। मनुष्य को अपने जीवन में भगवान के लिए थोड़ा समय निकालना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार बैंक किसी व्यक्ति को ऋण देते समय एक निश्चित हिस्सा स्वयं लगाने की अपेक्षा करता है, उसी प्रकार जीवन में भगवान को पाने के लिए व्यक्ति को भी अपनी ओर से प्रयास और समर्पण करना आवश्यक है।
जब भक्त अपनी ओर से थोड़ा कदम बढ़ाता है तो भगवान उसके लिए आगे का मार्ग प्रशस्त करते हैं। उन्होंने कहा कि भक्ति केवल मंदिर जाने या धार्मिक आयोजन में शामिल होने तक सीमित नहीं है, बल्कि भगवान के प्रति विश्वास, सेवा, सद्भाव और अच्छे कर्मों को जीवन में अपनाना भी भक्ति का ही स्वरूप है। व्यक्ति यदि अपने कर्मों में ईमानदारी और मन में श्रद्धा रखे तो कठिन परिस्थितियों में भी उसे निराश नहीं होना चाहिए। कथा के दौरान भक्ति भाव से जुड़े प्रसंगों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सच्चा भक्त विपरीत परिस्थितियों में भी भगवान पर विश्वास बनाए रखता है। इसी भाव को मेरा क्या बिगड़ेगा बनवारी, जाएगी लाज तुम्हारी जैसे भक्ति भाव के माध्यम से समझाया गया। नियमित रूप से भजन, कथा श्रवण और प्रभु स्मरण किया जाए तो मन को शांति मिल सकती है।
- भगवान अपने भक्त को कभी नहीं भूलते
उन्होंने श्रद्धालुओं को समझाते हुए कहा कि मनुष्य संसार के लोगों के पास बार-बार जाता है। यदि किसी व्यक्ति के पास दो बार जाएं और तीसरी बार न जाएं तो लोग पहले की गई सेवा और मुलाकातों को भी भूल जाते हैं। लेकिन भगवान के दरबार की महिमा अलग है। यदि कोई व्यक्ति सौ बार में केवल एक बार भी सच्चे मन से भगवान के पास पहुंचता है, तो भगवान उसे स्वीकार कर लेते हैं और उसके जीवन की कठिनाइयों से पार लगाने का मार्ग प्रशस्त करते हैं। महाराज जी ने कहा कि भगवान से संबंध कभी समाप्त नहीं होता। मनुष्य भले ही संसार की भागदौड़ में भगवान को भूल जाए, लेकिन भगवान अपने भक्त को कभी नहीं भूलते। आवश्यकता इस बात की है कि व्यक्ति अपने जीवन में भक्ति, श्रद्धा और समर्पण के लिए थोड़ा समय निकाले। उन्होंने कहा कि भगवान को पाने के लिए बड़े-बड़े साधनों की आवश्यकता नहीं है। सच्चे मन से लिया गया भगवान का नाम, थोड़ी-सी सेवा, प्रेमपूर्वक किया गया अर्पण और संकट के समय भगवान पर रखा गया विश्वास ही भक्त और भगवान के बीच का संबंध मजबूत करता है।
भगवान भाव के भूखे हैं और भक्त की भावना को कई गुना करके लौटाते हैं। इस अवसर पर महामंत्री ओम मालव, बांके बिहारी मंदिर समिति के अध्यक्ष राजेन्द्र खंडेलवाल, महामंत्री गिरधर बढेरा, कोषाध्यक्ष ब्रदी लाल नागर, कार्यकारी अध्यक्ष राजेन्द्र गुप्ता, आयोजन समिति संरक्षक कुंज बिहारी गौतम, दिनेश खंडेलवाल, दुगार्शंकर नागर, चन्द्र शेखर शर्मा सहित कई लोग उपस्थित रहे।
