समकित जैन @ कोटा
नए कोटा यानी कोटा दक्षिण की जनता को मिलने वाला 209 करोड़ का पानी पिछले 422 दिनों से फाइलों में बंद हैं। एक साल से ज्यादा का समय बीत गया लेकिन, जलदाय विभाग के अफसर काम शुरू कराना तो दूर, एजेंसी तक तय नहीं कर पा रहे। इसकी वजह प्रशासनिक कारण और समस्याओं को बताया जा रहा है।
नागरिक अभिव्यक्ति की पड़ताल में सामने आया कि 2025 से 2026 के बीच दो बार टेंडर निकाले जा चुके हैं, लेकिन वो पूरे नहीं हुए। दोनों बार टेंडर बीच में रद्द करने पड़े। अब अप्रैल 2026 में वापस तीसरी बार टेंडर किया गया है, लेकिन वो भी पिछले 5 माह से प्रक्रिया में उलझा हुआ है। यानी कोटावासियों को इस योजना से दोहरी मार लगना तय है। पहली- लोगों को पानी के लिए ज्यादा इंतजार करना पड़ेगा और दूसरी- देरी की वजह से परियोजना की लागत बढ़ेगी, जिसका खर्च जनता अपनी ही जेब से भरेगी। दरअसल, अमृत 2.0 के तहत शहर के दक्षिणी हिस्से की पेयजल व्यवस्था मजबूत करने के लिए 208.95 करोड़ रुपए की योजना बनी थी। जिसमें नई पाइप लाइन बिछा कर जलापूर्ति करनी थी। ‘वाटर सप्लाई स्कीम फॉर ऑग्मेंटेशन ऑफ यूडबल्यूएसएस कोटा साउथ’ के तहत इस प्रोजेक्ट की कुल लागत 208 करोड़ 95 लाख 26 हजार रुपए है। योजना में निर्माण के साथ एक साल की डिफेक्ट लायबिलिटी और उसके बाद 5 साल संचालन और रख-रखाव भी शामिल है। प्रोजेक्ट बनाते समय इस पूरे काम की अवधि 730 दिन तय की गई थी। लेकिन, अब 422 दिन बीत चुके है और काम शुरू तक नहीं हुआ।
कैसी विडंबना.. फाइल पास, पैसा मंजूर, लेकिन काम ही शुरू नहीं करवा पाए
7 अप्रैल 2026 : दूसरा टेंडर रद्द होने के अगले ही दिन 7 अप्रैल को वापस तीसरा टेंडर एनआईटी -1/2026-27 निकाल दिया गया। इस बार 7 मई तक बोलियां मांगी गईं और 8 मई को तकनीकी बोली खुली। पांच कंपनियां- जीकेसीसी प्रोजेक्ट्स एंड वर्क्स, एलसीसी प्रोजेक्ट्स लिमिटेड, एलएनए इंफ्राप्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, एम/एस कीस्टोन इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड और विंध्या टेलीलिंक्स लिमिटेड
25 जुलाई 2025 : पहली कोशिश 25 जुलाई 2025 को हुई। एनआईटी- 11/2025-26 के तहत टेंडर निकला। कंपनियों को 11 सितंबर तक बोली देनी थी और 12 सितंबर को बोली खुलनी थी। लेकिन करीब 5 महीने बाद 29 दिसंबर को पूरी प्रक्रिया बंद कर दी गई। कारण सिर्फ इतना बताया गया कि प्रशासनिक समस्याएं हैं। यानी जुलाई से दिसंबर तक
30 दिसंबर 2025 : 29 दिसंबर को पूरी प्रक्रिया बंद करने के अगले ही दिन दूसरी कोशिश शुरू हुई। एनआईटी -16/2025-26 में फिर वही 208.95 करोड़ की योजना का टेंडर निकला। पहले इसकी बोली की समय सीमा जनवरी में थी, जिसे आगे बढ़ाते-बढ़ाते 9 अप्रैल 2026 तक किया गया और 10 अप्रैल को बोली खुलनी थी। लेकिन यह टेंडर भी मंजिल तक
दो साल पानी को तरसेगा नया कोटा
अमृत 2.0 के तहत कोटा शहर की पेयजल व्यवस्था को अगले 30 वर्षों की जरूरतों के हिसाब से मजबूत करने के लिए 209 करोड़ की योजना स्वीकृत की गई थी। कोटा दक्षिण में रानपुर, नया गांव, आंवली-रोझड़ी, विवेकानंद नगर और आरके पुरम के आसपास के इलाकों को योजना में शामिल किया गया। जलदाय विभाग ने योजना बनाते समय दावा किया था कि शहर की बढ़ती आबादी, नई कॉलोनियों, सरकारी संस्थानों, औद्योगिक क्षेत्रों और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए दीर्घकालीन पेयजल व्यवस्था तैयार की जाएगी। योजना को करीब 3 साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था और 2027 तक शहर के कई हिस्सों में 24 घंटे जलापूर्ति शुरू करने की बात कही गई थी। अब पहला टेंडर निकले 422 दिन हो चुके हैं और निर्माण की 730 दिन की अवधि अभी शुरू नहीं हुई। यदि अब तुरंत ठेका देकर काम शुरू
दो वर्जन आएंगे अफसर विधायक संदीप शर्मा दो वर्जन आएंगे अफसर विधायक संदीप शर्मा दो वर्जन आएंगे अफसर विधायक संदीप शर्मा दो वर्जन आएंगे अफसर विधायक संदीप शर्मा दो वर्जन आएंगे अफसर विधायक संदीप शर्मा दो वर्जन आएंगे अफसर
-संदीप शर्मा, विधायक
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-अफसर, अफसर
