कोटा। लोकदेवता वीर तेजाजी महाराज की आराधना का पर्व तेजा दशमी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। किशोर सागर तालाब स्थित वीर तेजाजी के थानक पर मेले का आयोजन किया गया है। सुबह से ही बाबा के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की कतारें लगने लगीं। शहर के अन्य तेजाजी थानकों पर भी श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
किशोर सागर स्थित थानक पर श्रद्धालुओं ने तेजाजी महाराज के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। लोकआस्था के अनुसार ‘डस्सी कटवाने’ की रस्म के लिए भी लोग पहुंचे। मेले में दर्शनार्थियों की आवाजाही के बीच तेजाजी के जयकारे गूंजते रहे।
ढोल-नगाड़ों के साथ निकले झंडा जुलूस
तेजा दशमी के अवसर पर ढोल-नगाड़ों के साथ झंडा जुलूस निकाले गए। ध्वज लेकर चल रहे श्रद्धालुओं ने ‘लीलण घोड़ी रा असवार’ और वीर तेजाजी महाराज के जयकारे लगाए। जुलूस के थानकों पर पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं ने ध्वज अर्पित कर पूजा की। ढोल की थाप और जयकारों से आयोजन स्थलों पर उत्सव का माहौल बना रहा।
तेजा गायन में सुनाई लोकदेवता की गाथा
पर्व पर जगह-जगह तेजा गायन, गीत महोत्सव और भजन-कीर्तन के आयोजन हो रहे हैं। गायकों ने लोकगीतों के माध्यम से तेजाजी महाराज की गाथा प्रस्तुत की। श्रद्धालुओं ने भजनों और तेजा गायन में भाग लेकर लोकदेवता के प्रति आस्था व्यक्त की।
थानकों पर धार्मिक अनुष्ठानों के साथ मेले का उत्साह भी दिखाई दिया। किशोर सागर तालाब के आसपास दर्शन के लिए पहुंच रहे लोगों से चहल-पहल बनी रही। पूजा-अर्चना, झंडा जुलूस और लोकगायन के माध्यम से श्रद्धालु तेजाजी की परंपरा से जुड़ते नजर आए।
सर्पदंश होने पर तुरंत अस्पताल पहुंचाएं
‘डस्सी कटवाना’ लोकआस्था से जुड़ी रस्म है, सर्पदंश का चिकित्सा उपचार नहीं। सांप के काटने पर रस्म या झाड़-फूंक के इंतजार में समय न गंवाएं और पीड़ित को तुरंत अस्पताल पहुंचाएं।
