नागरिक अभिव्यक्ति @ कोटा एक तरफ कोटा को स्वच्छता के मामले में इंदौर जैसा बनाने की कवायद चल रही है, दूसरी तरफ थेकड़ा पुलिया के पास नगर निगम का कचरा पॉइंट स्वच्छता के दावों की हकीकत उजागर कर रहा है। यहां शहरभर का कचरा पहुंचता है। स्थानीय निवासी महावीर प्रसाद और नरेश राजावत का कहना है कि कचरे में फेंकी गई प्लास्टिक की थैलियाें से खाना खाने के लिए बड़ी संख्या में गौमाताएं यहां पहुंचती हैं।
उनके भोजन के साथ में वो प्लास्टिक भी खा जाती है। जो उनके स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन रहा है। इसके बावजूद कचरे के उचित निस्तारण और गौमाताओं को इससे दूर रखने की व्यवस्था नहीं की जा रही। इस कचरा पॉइंट के पास ही राजस्थान का प्रसिद्ध शिवपुरी धाम, बच्चों का स्कूल और रिहायशी आबादी है। ऐसे में दुर्गंध, स्वच्छता और संभावित स्वास्थ्य जोखिमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जब शहर को स्वच्छ बनाने के दावे हो रहे हैं, तो आबादी के नजदीक कचरे के इस ढेर का समाधान कब होगा? लोगों को आश्वासन नहीं, कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण और गौमाताओं की सुरक्षा के लिए ठोस कार्रवाई चाहिए।
