नागरिक अभिव्यक्ति @ कोटा
कोटा। जन्म के बाद सांस लेने में गंभीर परेशानी और रक्त में ऑक्सीजन की कमी से जूझ रहे तीन दिन के नवजात की सुधा हॉस्पिटल एंड मेडिकल रिसर्च सेंटर में जटिल हृदय सर्जरी की गई। शिशु के हृदय से निकलने वाली दो प्रमुख धमनियां जन्मजात रूप से गलत स्थान पर जुड़ी हुई थीं, जिससे शरीर में ऑक्सीजनयुक्त रक्त का सामान्य प्रवाह प्रभावित हो रहा था। कार्डियक सर्जन डॉ. पलकेश अग्रवाल ने आर्टेरियल स्विच ऑपरेशन कर धमनियों को सही स्थान पर जोड़ा। अस्पताल के अनुसार, सर्जरी के बाद शिशु का ऑक्सीजन स्तर 99 प्रतिशत तक पहुंच गया है और स्वास्थ्य में सुधार के बाद वह अपनी मां की गोद में है।
गर्भावस्था में ही हो गई थी बीमारी की पहचान
इस मामले में गर्भावस्था के दौरान ही बीमारी का पता चल गया था। पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. दीपेश गुप्ता ने गर्भावस्था के 25वें सप्ताह में फीटल इकोकार्डियोग्राफी जांच के जरिए शिशु के जन्मजात हृदय रोग की पहचान की थी। इससे जन्म के बाद उपचार की पूर्व योजना बनाने में मदद मिली।
नियोनेटोलॉजिस्ट डॉ. मनीषा गर्ग ने बताया कि जन्म के बाद शिशु को सांस लेने में परेशानी हुई और रक्त में ऑक्सीजन का स्तर गंभीर रूप से कम हो गया। वेंटिलेटर सपोर्ट देने के बावजूद अपेक्षित सुधार नहीं होने पर विशेषज्ञ टीम ने सर्जरी का निर्णय लिया।
तीन दिन के शिशु में चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन
डॉ. पलकेश अग्रवाल ने बताया कि आर्टेरियल स्विच ऑपरेशन में हृदय से निकलने वाली प्रमुख धमनियों को सही स्थान पर जोड़कर रक्त प्रवाह की सामान्य दिशा स्थापित की जाती है। महज तीन दिन के नवजात में यह प्रक्रिया चुनौतीपूर्ण थी। सर्जरी के बाद शिशु की गहन निगरानी और रिकवरी डॉ. मनीषा गर्ग की देखरेख में हुई।
उपचार में डॉ. पुरुषोत्तम मित्तल, डॉ. प्रवीण कोठारी, डॉ. लक्ष्मी सांख्यान, डॉ. अंकुर दीक्षित, डॉ. राकेश मालव, डॉ. प्राची गोयल, महेश गहलोत और पूजा मल्होत्रा सहित नर्सिंग एवं सहयोगी स्टाफ का योगदान रहा।
हाड़ौती में जटिल हृदय उपचार की सुविधाएं
डॉ. पलकेश अग्रवाल के अनुसार, सुधा हॉस्पिटल में नवजातों और बच्चों की जटिल हृदय सर्जरी के साथ वयस्कों के लिए बाईपास सर्जरी (सीएबीजी), मिनिमली इनवेसिव कार्डियक सर्जरी (एमआईसीएस), कार्डियक आईसीयू और ईसीएमओ जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। अस्पताल के अनुसार, इन सुविधाओं से हाड़ौती क्षेत्र के मरीजों को जटिल हृदय रोगों के उपचार के लिए स्थानीय स्तर पर चिकित्सा सुविधा मिल रही है।
यह मामला जन्मजात हृदय रोगों की समय पर पहचान, जन्म के बाद त्वरित चिकित्सकीय निर्णय और विशेषज्ञों के समन्वय की अहमियत को रेखांकित करता है।
