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कचौड़ी से डिजिटल टेप तक... स्टार्टअप में नई पहचान गढ़ रहा कोटा

मुंबई-बेंगलुरु की नौकरी छोड़ युवाओं ने कोटा से शुरू किए कारोबार

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नागरिक अभिव्यक्ति @ कोटा

अब कोटा सिर्फ डॉक्टर-इंजीनियर ही नहीं, उद्यमी भी तैयार कर रहा है। शहर के तीन युवाओं ने तीन अलग-अलग क्षेत्रों में परंपरागत सोच को कारोबार में बदल दिया। बीएससी एग्रीकल्चर करने वाले यशराज ने खेती में बाजार तलाशा। देखा कि मशरूम की मांग बढ़ रही है, जबकिउत्पादन बेहद कम है। यहीं से कारोबार निकला। पॉकेट मनी जोड़कर करीब 10 से 15 हजार जुटाए और छोटे से कमरे में केवल 50 बैग से मशरूम उत्पादन शुरू किया। पहले प्रयास में ही करीब 15 से 20 हजार रुपए का शुद्ध लाभ हुआ। इसके बाद उत्पादन बढ़ाने की कोशिश की, लेकिन बैंक और अन्य संस्थानों से फंडिंग नहीं मिली। आज 20 लाख रुपए सालाना कारोबार कर रहा है और 15 से 20 लोगों को रोजगार दे रहा है।

अब कोटा सिर्फ डॉक्टर-इंजीनियर ही नहीं, उद्यमी भी तैयार कर रहा है। शहर के तीन युवाओं ने तीन अलग-अलग क्षेत्रों में परंपरागत सोच को कारोबार में बदल दिया। बीएससी एग्रीकल्चर करने वाले यशराज ने खेती में बाजार तलाशा। देखा कि मशरूम की मांग बढ़ रही है, जबकिउत्पादन बेहद कम है। यहीं से कारोबार निकला। पॉकेट मनी जोड़कर करीब 10 से 15 हजार जुटाए और छोटे से ची टेप का नाप सीधे मोबाइल में पहुंचा

जितेंद्र सिंह ने 2022 में 'क्रिएटिव टेक्नोलॉजी' स्टार्टअप शुरू किया। चार साल की रिसर्च के बाद उन्होंने पारंपरिक फीते को डिजिटल तकनीक से जोड़कर स्मार्ट ब्लूटूथ मेजरमेंट टेप बनाया। यह डिवाइस नाप लेते ही आंकड़े सीधे मोबाइल या टैबलेट के सॉफ्टवेयर में दर्ज कर देती है, जिससे कागजी काम खत्म होता है कंपनी का दावा है कि यह सामान्य फीते से 5 गुनातेज है। भारत में पेटेंट प्राप्त इस स्वदेशी तकनीक को आदित्य बिड़ला और रिलायंस जैसी दिग्गज कंपनियां अपना रही हैं। यह तकनीक अब बांग्लादेश, श्रीलंका, यूरोप और अमेरिका तक निर्यात हो रही है।

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विशेष संवाददाता

नागरिक अभिव्यक्ति विशेष डिजिटल रिपोर्टर एवं विश्लेषक।

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