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सोनिया गांधी पहले वोटर कैसे बनीं, नागरिक बाद में? मदन राठौड़ का SIR पर कांग्रेस पर निशाना

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष बोले- उस समय SIR होता तो मतदाता सूची में नाम नहीं आता; कहा- मतदाता वही हो जिसकी देश में जड़ें हों

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सोनिया गांधी पहले वोटर कैसे बनीं, नागरिक बाद में? मदन राठौड़ का SIR पर कांग्रेस पर निशाना
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नागरिक अभिव्यक्ति । जयपुर

जयपुर, 6 अक्टूबर। मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच चल रही राजनीतिक बहस के बीच राजस्थान भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने सोनिया गांधी के पुराने मतदाता रिकॉर्ड का मुद्दा उठाया है। मंगलवार को भाजपा मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत में राठौड़ ने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी भारत की नागरिक बनने से पहले ही मतदाता सूची में दर्ज हो गई थीं। उन्होंने कहा कि अगर उस समय SIR जैसी प्रक्रिया होती तो उनका नाम मतदाता सूची में नहीं आता। हालांकि यह दावा राजनीतिक बयान और पुराने न्यायिक विवाद से जुड़ा है; दिल्ली की अदालत में इसी मुद्दे पर शिकायत हुई थी और 2026 में उस मामले को दोबारा सुनवाई के लिए भेजा गया है।

राठौड़ ने कहा, “सोनिया गांधी मतदाता पहले बन गईं और देश की नागरिक बाद में बनीं, इसे ही वोट चोरी कहते हैं। SIR में इसी का शुद्धिकरण हो रहा है।” उन्होंने विपक्ष के SIR विरोध पर सवाल उठाते हुए कहा कि मतदाता सूची में पात्र और अपात्र लोगों की पहचान जरूरी है।

सोनिया गांधी के पुराने मतदाता रिकॉर्ड को लेकर विवाद नया नहीं है। दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत में दायर शिकायत में आरोप लगाया गया था कि उनका नाम नई दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र की 1980 की मतदाता सूची में दर्ज था, जबकि शिकायतकर्ता के अनुसार उन्होंने 30 अप्रैल 1983 को भारतीय नागरिकता हासिल की। रिपोर्टों के मुताबिक उनका नाम 1982 में सूची से हटाया गया और 1983 में फिर दर्ज हुआ। सितंबर 2025 में मजिस्ट्रेट अदालत ने एफआईआर की मांग वाली शिकायत खारिज कर दी थी, लेकिन सितंबर 2026 में विशेष अदालत ने उस आदेश को रद्द करते हुए मामले को दोबारा मजिस्ट्रेट के समक्ष सुनवाई के लिए भेज दिया।

मदन राठौड़ ने कहा कि देश में मताधिकार का आधार स्पष्ट होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिसकी जड़ें देश में हैं, जिसके पूर्वज इस देश के नागरिक रहे हैं और जो भारत को अपनी मातृभूमि, पितृभूमि और पुण्यभूमि मानता है, उसे मताधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि बाहर से आकर भारत में व्यापार या कामकाज के लिए रहने वाले व्यक्ति को किस आधार पर मताधिकार दिया जाए।

उन्होंने कहा कि SIR में पात्र मतदाताओं की पहचान और मतदाता सूची के शुद्धिकरण की प्रक्रिया पर आपत्ति नहीं होनी चाहिए और जनादेश का सम्मान किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि किसी ऐसे व्यक्ति को मताधिकार नहीं मिलना चाहिए जो केवल लाभ लेने के लिए भारत आया हो और बाद में यहां से चला जाए।

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में SIR को लेकर विपक्ष और सत्तारूढ़ दल आमने-सामने हैं। निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर SIR-2026 के तहत मतदाता सूची, नाम खोजने और पुनरीक्षण से संबंधित सुविधाएं उपलब्ध हैं।

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लेखक

विशेष संवाददाता

नागरिक अभिव्यक्ति विशेष डिजिटल रिपोर्टर एवं विश्लेषक।

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