जब मैंने कोटा विकास प्राधिकरण की कमान संभाली, तो मेरे सामने सबसे बड़ी चुनौती इस तेजी से बढ़ते शहर को एक सुनियोजित विकास देना था। पहले यूआईटी के समय सिर्फ 2 लाख एकड़ जमीन हमारे दायरे में थी, जो केडीए बनने के बाद बढ़कर 5 लाख एकड़ हो चुकी है। इसका 83% हिस्सा पेरिफेरी (बाहरी क्षेत्र) में आता है। इतने बड़े इलाके के संतुलित विकास के लिए मैं 'मास्टर प्लान 2031' के बाद अब एक नया मास्टर प्लान तैयार करवा रहा हूँ। वर्तमान में हम कोटा में लगभग 1,500 करोड़ के विकास कार्य करवा रहे हैं। 12 जून से चल रहे शहरी सेवा शिविरों में पट्टों, लीज मनी और लैंड कन्वर्जन में भारी छूट दी जा रही है। मैं खुद हर दूसरे और चौथे गुरुवार को जनसुनवाई करता हूँ। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के प्रयासों से नया एयरपोर्ट दिसंबर 2027 तक ऑपरेशनल हो जाएगा। हमारा लक्ष्य कोटा को 'ग्रीन कोटा' और 'नाइट टूरिज्म' का हब बनाकर 2030 तक देश का सबसे विकसित शहर बनाना है। एयरपोर्ट के बिल्कुल पास हम वर्ल्ड क्लास 'एरोसिटी' विकसित करने जा रहे हैं। इसकी जमीन चिन्हित कर लैंड यूज चेंज करा लिया गया है। यह एक कंपोजिट सिटी होगी, जिसमें रीको के लिए औद्योगिक क्षेत्र, एकेडमिक इंस्टीट्यूशंस और कमर्शियल सेक्टर्स होंगे। इसके साथ ही, कोटा में पहली बार हम 'लैंड पूलिंग स्कीम' पर काम कर रहे हैं, जिसमें कृषकों की सहमति से जमीन लेकर 2 साल की समय-सीमा में योजना विकसित की जाएगी और उन्हें विकसित प्लॉट दिए जाएंगे। हाल ही में हमने 'राजनगर' और 'प्रताप सिंह बारहट' नामक दो नई टाउनशिप लॉन्च की हैं, जहाँ अलॉटी को मौके पर ही वेल-डिफाइंड बाउंड्री और बुनियादी सुविधाएं मिलेंगी।
मथुराधीश कॉरिडोर का काम शुरू
आस्था के बड़े केंद्र 'मथुराधीश कॉरिडोर' का काम शुरू होने वाला है। कोटा को रिंग रोड से जोड़ने के लिए सालों से अटका नॉर्दर्न बाईपास का काम रफ्तार पकड़ चुका है। मैंने खुद मौके पर जाकर निरीक्षण किया और बाधाओं को दूर कर दिया है। कॉलोनियों में पानी भरना और नालों के उफान से मगरमच्छों व अन्य जीवों का बस्तियों में घुस आना एक बड़ी समस्या रही है। इसके स्थाई समाधान के लिए हमने 280 से 300 करोड़ का एक मेगा ड्रेनेज प्लान तैयार किया है। राजस्थान सरकार के मिटिगेशन फंड से हमें 50 करोड़ की पहली मंजूरी मिल चुकी है और 150 करोड़ की अतिरिक्त स्वीकृति जल्द ही मिल जाएगी। इसके तहत कोटा के सभी बड़े नालों को टैप और चैनलाइज किया जाएगा ताकि बारिश का पानी सही जगह जा सके।
