शिखर दर्शनं पाप नाशनम्, ध्वज दर्शनं मुक्ति दायकम्
यावत् पश्यति लांगूलं तावद् भवति पावनम्
अर्थ: मंदिर के शिखर का दर्शन करने से संचित पापों का नाश होता है और उस पर लहराते ध्वज के दर्शन से
मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। जब तक मनुष्य की दृष्टि उस ध्वज पर रहती है, वह पवित्र बना रहता है।
नागरिक अभिव्यक्ति . कोटा
कोटा प्रभु श्री मथुराधीश जी की वह पावन धरा है, जिसका कोना-कोना ठाकुर जी की भक्ति के रस से सिंचित है। शहर के प्राचीन परकोटे के बीच, पाटनपोल के हृदय स्थल पर स्थित बड़े मंदिर का यह 'शिखर' और इस पर लहराती 'धर्म ध्वजा' सदियों से कोटा की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना का सर्वोच्च प्रतीक रही है। पुष्टिमार्ग (वल्लभ संप्रदाय) की प्रथम पीठ और कोटा के आराध्य प्रभु श्री मथुराधीश जी के मंदिर का यह गगनचुंबी शिखर और दिव्य महाध्वज हाड़ौती अंचल की अगाध आस्था का केंद्र है। वायु के वेग के साथ लहराता हुआ यह ध्वज न केवल संपूर्ण क्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है, बल्कि मानवीय अहंकार को मिटाकर समर्पण का भाव जाग्रत करता है। इसीलिए 'नागरिक अभिव्यक्ति' अपने प्रवेशांक का प्रथम प्रणाम कोटा की इसी सनातन आध्यात्मिक विरासत को समर्पित करता है। आइए, प्रभु के इस अलौकिक ध्वज की छांव में हम मंदिर के गौरवशाली इतिहास और आकार ले रहे भव्य कॉरिडोर के बदलते स्वरूप से रूबरू हों। धार्मिक टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए काशी और उज्जैन कॉरिडोर की तर्ज पर कोटा में भी एक ऐतिहासिक नवाचार होने जा रहा है। शहर के प्रसिद्ध श्री मथुराधीश मंदिर कॉरिडोर के पहले चरण का काम जल्द शुरू हो चुका है। जल्द यहां भगवान मथुराधीश का दिव्य दरबार सजेगा।
पहली बार शिखर और ध्वज से कीजिए मथुराधीश जी के दर्शन
प्रभु श्री मथुराधीश जी के विग्रह का फोटो-वीडियो लेना और प्रकाशित करना पूर्णतः वर्जित है। हम इस मर्यादा का पूर्ण सम्मान करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मंदिर के शिखर को देखने से पापों का नाश होता है और उस पर लहराते ध्वज का श्रद्धापूर्वक दर्शन करने से मानसिक बंधनों से मुक्ति मिलती है; इसे साक्षात प्रभु दर्शन के समान ही फलदायी माना गया है। इसीलिए, प्रथम अंक पर हम समस्त भक्तों को ठाकुर जी के इसी रूप के दर्शन करवा रहे हैं। ऐसा पहली बार है, जब भक्त शिखर-ध्वज दर्शन से मन में बिराजे ठाकुरजी के रूप को निहारेंगे।
