कोटा मेडिकल कॉलेज प्रदेश का एक ऐसा प्रमुख मेडिकल हब बनकर उभरा है, जो कई मायनों में जोधपुर, बीकानेर, उदयपुर और अजमेर जैसे पुराने स्थापित मेडिकल कॉलेजों को भी पीछे छोड़ रहा है। यहां स्वतंत्र रूप से किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा सफलतापूर्वक संचालित की जा रही है, जबकि अन्य संभागों के यूरोलॉजी विभाग हमसे कहीं अधिक पुराने हैं। हमारे पास एमबीबीएस की 250 सीटें हैं और सुपर स्पेशलिटी को मिलाकर प्रतिवर्ष लगभग 250 स्नातकोत्तर स्टूडेंस डॉक्टर बन रहे हैं। प्रोस्टेटिक सर्जरी के लिए अत्याधुनिक रोबोट की घोषणा हो चुकी है, जिसकी वित्तीय व प्रशासनिक स्वीकृति जल्द ही आने वाली है। इस रोबोटिक तकनीक के आते ही कोटा, जयपुर के बाद पूरे प्रदेश का दूसरा ऐसा राज्य सरकारी संस्थान बन जाएगा जहां रोबोटिक सर्जरी की सुविधा उपलब्ध होगी। यह तकनीक चिकित्सा के क्षेत्र में एक युगांतरकारी बदलाव लाएगी, जिससे हाड़ौती ही नहीं बल्कि पड़ोसी राज्यों के मरीजों को भी विश्वस्तरीय इलाज मिल सकेगा।
रोबोटिक सर्जरी से प्रोस्टेट कैंसर के मरीजों की सर्जरी होगी
रोबोटिक सर्जरी बेहद जटिल और संवेदनशील ऑपरेशनों के लिए दुनिया की सबसे आधुनिकतम विधा है। सामान्यतः एक सर्जन के हाथ अधिकतम 3 से 4 डिग्री तक ही मूव कर सकते हैं, लेकिन रोबोटिक आर्म्स में 7 डिग्री मूवमेंट की क्षमता होती है। मानव शरीर में पेल्विस की संरचना ऐसी होती है, जहां सर्जन के लिए एक साथ देखना और हाथ से काम करना बेहद कठिन होता है। रोबोट के जरिए सर्जन बेहद स्पष्टता से देख भी सकते हैं और अत्यंत सूक्ष्मता से काम भी कर सकते हैं। इस रोबोट के आने से प्रोस्टेट कैंसर जैसी जटिल और संवेदनशील सर्जरी कोटा में बेहद सामान्य, सुरक्षित और उच्च गुणवत्तापूर्ण हो जाएगी।
सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक का विस्तार और नई मशीनें
अस्पताल में अभी 10 विभाग चल रहे है। डेक्सा स्कैन और फाइब्रो स्कैन जैसी आधुनिक मशीनें स्थापित कर जांचें शुरू कर दी गई हैं। हमारे पास गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी सर्जरी और मेडिकल ऑनकोलॉजी विभाग की फैकल्टी स्वीकृत है। इनके जॉइन करते ही इन दोनों विभागों की सेवाएं भी पूरी गति से शुरू होगी। आगामी समय में हमें क्रिटिकल केयर ब्लॉक के लिए भी मैनपावर मिलने की उम्मीद है। एनएमसीएच की इमरजेंसी से एक महीने में औसतन 650 मरीज भर्ती होते थे। प्रोजेक्ट लागू होने के बाद यह आंकड़ा लगभग दोगुना होकर 1200 मरीज प्रति माह तक पहुंच गया है। इस सफल मॉडल को 3 महीने पूरे होने के बाद जल्द ही एमबीएस की इमरजेंसी में भी लागू किया जाएगा।
अस्पताल और टॉयलेट्स सफाई की रोज मॉनिटरिंग
इलाज के साथा स्वच्छता हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। अस्पताल परिसर और टॉयलेट्स को पूरी तरह स्वच्छ रखने की दैनिक स्तर पर मॉनिटरिंग की जा रही है। प्रत्येक फ्लोर पर विशेष सफाई निरीक्षक/स्वास्थ्य निरीक्षक तैनात किए गए हैं, जो 24 घंटे तैनात है।
एमपी से आ रहे मरीज
मध्य प्रदेश के केवल सीमावर्ती जिले जैसे शिवपुर और गुना ही नहीं, बल्कि जबलपुर, रतलाम और इंदौर जैसे सुदूर शहरों से भी मरीज इलाज के लिए कोटा आ रहे हैं। किसी सरकारी अस्पताल में इतनी दूरी तय करके मरीजों का आना यह साबित करता है कि हमारी सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं और डॉक्टरों की विशेषज्ञता पर अटूट विश्वास कायम है।
