कोटा कोचिंग के क्लास रूम में एआई ने मजबूत पैठ बना ली है। जेईई और नीट की तैयारी को अधिक सटीक, प्रभावी और कस्टमाइज्ड बनाया जा रहा हैं। मोशन इंस्टीट्यूट जैसे अग्रणी संस्थानों ने अपने इकोसिस्टम को पूरी तरह बदल दिया है। उसने 'परफॉर्मेंस-एफर्ट मैट्रिक्स' जैसे उन्नत डेटा टूल्स को लागू किया है। इसके तहत जब कोई छात्र डिजिटल प्लेटफॉर्म या ऐप के जरिए अभ्यास करता है या टेस्ट देता है, तो एआई एल्गोरिदम उसके प्रदर्शन का बारीकी से विश्लेषण करता है। इस मॉडल की स्वीकार्यता देशव्यापी होती जा रही है। आंकड़ों पर नजर डालें तो देश भर में जेईई और नीट के लिए पंजीकरण कराने वाले करीब 40 लाख छात्रों में से महज 3 से 4% छात्र ही वर्तमान में कोटा आ पाते हैं। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि जैसे-जैसे एआई और डेटा-संचालित पद्धतियां पढ़ाई को अधिक सुलभ और तनावमुक्त बनाएंगी, कोटा आने वाले विद्यार्थियों की संख्या में और इजाफा होना तय है।
रील से रियल लाइफ के 'जीतू भैया'
कोचिंग राजधानी कोटा में 'एनवी सर' के नाम से मशहूर नितिन विजय आज शिक्षा जगत का एक जाना-माना चेहरा हैं। वेब सीरीज 'कोटा फैक्ट्री' के किरदार 'जीतू भैया' से लेकर हाल ही में हुए 'द ग्रेट इंडियन कपिल शो' तक वे कोटा का डंका बजाते आ रहे हैं। उनकी कहानी कोटा की उन्हीं गलियों से शुरू होती है, जहां उन्होंने आईआईटी की तैयारी की और आईआईटी-बीएचयू से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। कॉर्पोरेट करियर की चमक-दमक के बजाय उन्होंने शिक्षा को बेहतर बनाने का संकल्प लिया और करीब 19 साल पहले 'मोशन एजुकेशन' की नींव रखी। आज मोशन देश के 80 से अधिक शहरों में अपनी पहचान बना चुका है। वह एक प्रखर मोटिवेशनल स्पीकर भी हैं, जो टेडएक्स और जोश टॉक्स जैसे मंचों पर युवाओं को प्रेरित कर चुके हैं। दुबई में आयोजित इंटरनेशनल एजुकेशन समिट में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके नितिन विजय को आईआईटी-बीएचयू द्वारा 'यंग अचीवर अवॉर्ड' और बिजनेस वर्ल्ड द्वारा दो बार ‘डिसरप्ट 40 अंडर 40’ की सूची में शामिल किया जा चुका है।
एआई एल्गोरिदम के प्रयोग से ला रहे निखार
कमजोरियों की पहचान
छात्र किन सवालों को छोड़ रहा है, किस विषय में ज्यादा समय ले रहा है और कहां गलतियां अधिक हो रही हैं, इसका डेटा रखना।
मिरेकल मशीन (सीपीएस)
एआई-बेस्ड कस्टमाइज्ड प्रैक्टिस शीट (सीपीएस) मशीन इसी डेटा के आधार पर छात्र को उसके मानसिक स्तर (आसान, मध्यम या कठिन) के अनुसार सवाल उपलब्ध कराती है। इससे औसत छात्रों को सरल से कठिन की ओर ले जाया जाता है, जबकि मेधावी छात्रों को चुनौतीपूर्ण सामग्री मिलती है।
आगामी तकनीक
संस्थान अब ऐसे क्लासरूम मॉड्यूल्स पर काम कर रहा है, जिससे शिक्षक एक घंटे की क्लास के तुरंत बाद एआई की मदद से रीयल-टाइम टेस्ट जनरेट कर सकेंगे और छात्रों को तुरंत परिणाम के साथ-साथ प्रतिस्पर्धा में उनकी वास्तविक स्थिति का पता चल सकेगा।
