नागरिक अभिव्यक्ति | बूंदी। नाबालिग से सोशल मीडिया के माध्यम से संपर्क कर उसे बहला-फुसलाकर भगाने और दुष्कर्म करने के मामले में पॉक्सो न्यायालय क्रम संख्या-1, बूंदी ने दोषी को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 50 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया है। मामले की सुनवाई न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने की।
विशिष्ट लोक अभियोजक मुकेश कुमार जोशी ने बताया कि मामला सदर थाना क्षेत्र का है। 1 सितंबर 2025 को नाबालिग की मां ने सदर थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार नाबालिग सुबह स्कूटी लेकर स्कूल में टेस्ट देने की बात कहकर घर से निकली थी, लेकिन दोपहर तक वापस नहीं लौटी।
परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। स्कूल में जानकारी लेने पर उसके वहां नहीं पहुंचने का पता चला। रिश्तेदारों और अन्य संभावित स्थानों पर तलाश के बावजूद जब उसका कोई सुराग नहीं मिला तो उसकी स्कूटी बस स्टैंड पर लावारिस हालत में मिली।
स्नैपचैट के जरिए हुई थी पहचान
पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की और नाबालिग को दस्तयाब किया। पूछताछ के दौरान सामने आया कि आरोपी ने स्नैपचैट के माध्यम से नाबालिग से संपर्क किया और बाद में उसे बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। अभियोजन के अनुसार आरोपी ने उसके साथ दुष्कर्म किया।
पुलिस ने अनुसंधान पूरा करने के बाद आरोपी के खिलाफ पॉक्सो अदालत में चालान पेश किया। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष 14 गवाहों के बयान दर्ज कराए तथा 26 महत्वपूर्ण दस्तावेज प्रदर्शित करवाए।
साक्ष्यों के आधार पर सुनाई सजा
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद न्यायालय ने आरोपी को नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म का दोषी माना। अदालत ने उसे 20 वर्ष के कठोर कारावास और 50 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया।
न्यायालय के इस फैसले के बाद नाबालिगों की सुरक्षा और सोशल मीडिया के माध्यम से होने वाले अपराधों को लेकर भी लोगों में जागरूकता की आवश्यकता सामने आई है।
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