नागरिक अभिव्यक्ति | बूंदी, 5 अक्टूबर। जब युवाओं की सोच अपनी ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण की दिशा में सकारात्मक होती है तो उपेक्षित धरोहरें भी फिर से निखरने लगती हैं। बूंदी में रामेष्ट युवा संस्थान के सदस्यों ने इसका उदाहरण पेश किया है। संस्थान के युवाओं और बालिकाओं ने तीन दिन तक श्रमदान कर बालचंद पाड़ा स्थित बालाकुंड की ऐतिहासिक ठंडी बावड़ी की सफाई कर उसे लगभग उसके मूल स्वरूप में लौटा दिया।
लंबे समय से जंगली पेड़ों, बबूल और कचरे से घिरी यह बावड़ी इतनी उपेक्षित हो चुकी थी कि सड़क से दिखाई तक नहीं देती थी। समय के साथ यह ऐतिहासिक धरोहर विलुप्त होने की कगार पर पहुंच रही थी। ऐसे में रामेष्ट युवा संस्थान के अध्यक्ष शिखर पंचोली और सचिव रोहन गुर्जर ने बावड़ी को फिर से उसके मूल स्वरूप में लाने का संकल्प लिया।
संस्थान के युवा पिछले तीन दिनों से लगातार बावड़ी में श्रमदान कर रहे थे। इस दौरान जंगली पेड़-बबूल काटकर हटाए गए तथा अंदर जमा कचरे को बाहर निकाला गया। लगातार मेहनत के बाद अब बावड़ी सड़क से स्पष्ट दिखाई देने लगी है और उसका प्राचीन स्वरूप भी सामने आने लगा है।
संरक्षण के लिए प्रशासन से करेंगे बात
संस्थान से जुड़े नारायण मंडोवरा ने बताया कि पहले बावड़ी सड़क से दिखाई नहीं देती थी, लेकिन तीन दिन के श्रमदान के बाद इसकी स्थिति में काफी बदलाव आया है। उन्होंने बताया कि अब बावड़ी के संरक्षण के लिए प्रशासन से चर्चा की जाएगी और इसे पर्यटन से जोड़ने के प्रयास भी किए जाएंगे, ताकि ऐतिहासिक धरोहर को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सके।
15 महीने में कई कुंड-बावड़ियों की सफाई
रामेष्ट युवा संस्थान से जुड़े सदस्यों के अनुसार संस्था पिछले करीब 15 महीनों से बूंदी की विभिन्न कुंड-बावड़ियों की सफाई और संरक्षण के लिए श्रमदान कर रही है। इसी अभियान के तहत ठंडी बावड़ी को भी स्वच्छ कर संरक्षित करने की दिशा में काम किया गया।
इस श्रमदान अभियान में निवर्तमान पार्षद मनीष सिसोदिया, माही राठौर, हर्षिता गौतम, अश्रू गौतम, शैलेन्द्र सिंह, धैर्य सिंह, मयंक, दीपक मेघवाल, अभिषेक सोनी, राकेश मेघवाल, जीतू गुर्जर, रोहित मेघवाल और विष्णु सैनी सहित कई युवाओं एवं बच्चों ने सक्रिय भूमिका निभाई।
संस्थान से जुड़े भूपेन्द्र योगी ने बताया कि बूंदी महोत्सव तक शहर की अन्य कुंड-बावड़ियों में भी श्रमदान कर स्वच्छता एवं विरासत संरक्षण का संदेश देने का प्रयास किया जाएगा। उनका कहना है कि युवाओं की भागीदारी से शहर की ऐतिहासिक धरोहरों को न केवल साफ-सुथरा किया जा सकता है, बल्कि उन्हें संरक्षण और पर्यटन के नए अवसरों से भी जोड़ा जा सकता है।
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