नागरिक अभिव्यक्ति | कोटा। तनिष्क एज्यूकेशन वेलफेयर सोसायटी सी. सैकण्डरी स्कूल, आकाशवाणी, कोटा की ओर से आयोजित 70वीं राज्य स्तरीय खेल 14 वर्षीय जूडो प्रतियोगिता का भव्य समापन शनिवार को हुआ। प्रतियोगिता का आयोजन 28 सितंबर से 3 अक्टूबर 2026 तक किया गया। समापन समारोह में प्रतियोगिता के विजेता एवं श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सम्मानित किया गया।
समापन समारोह के मुख्य अतिथि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता राजस्थान कुश्ती संघ के अध्यक्ष एवं ओम बिरला के ओएसडी राजीव दत्ता ने की। विशिष्ट अतिथियों में विशाल शर्मा, जिलामहामंत्री देहात एवं अध्यक्ष स्टेट सीमेंट कॉर्पोरेशन, कोटा जूडो संघ अध्यक्ष युवराज सुवालका तथा सीसीआई कोचिंग इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर वीरेन्द्र सिंह राठौड़ मौजूद रहे।
जमीन से जुड़ा खिलाड़ी बेहतर प्रदर्शन करता है : राजेश कृष्ण बिरला
समापन समारोह में मुख्य वक्ता राजेश कृष्ण बिरला ने खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए कहा कि खिलाड़ी जितना जमीन से जुड़ा रहता है, उतना ही उसका प्रदर्शन बेहतर होता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में केंद्र और राज्य सरकार की ओर से खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रोत्साहन दिया जा रहा है। युवा खिलाड़ियों को इन अवसरों का लाभ उठाना चाहिए।
उन्होंने जूडो के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जूडो खिलाड़ियों को तकनीक, संतुलन और धैर्य के माध्यम से चुनौती का सामना करना सिखाता है। खेल के ये गुण जीवन के संघर्षों में भी काम आते हैं और बच्चों को कभी हार न मानने की प्रेरणा देते हैं।
खेलों से स्वस्थ शरीर और मजबूत मानसिकता का निर्माण : राजीव दत्ता
राजस्थान कुश्ती संघ अध्यक्ष राजीव दत्ता ने कहा कि खेलों से स्वस्थ शरीर के साथ सशक्त मानसिकता का निर्माण होता है। उन्होंने कहा कि बच्चा खेल मैदान में जितना पसीना बहाता है, उतना ही स्वास्थ्य और सफलता की दिशा में आगे बढ़ता है। आज के दौर में बच्चों को मोबाइल से दूर कर खेल मैदान से जोड़ना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे को अपनी रुचि के अनुसार किसी न किसी खेल को जरूर अपनाना चाहिए। जूडो और कुश्ती जैसे खेलों से शारीरिक विकास के साथ मानसिक दृढ़ता और आत्मनिर्भरता का भी विकास होता है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए सुविधाएं एवं प्रोत्साहन योजनाएं उपलब्ध करा रही हैं।
छात्रा वर्ग के परिणाम
23 किलोग्राम भारवर्ग में श्रीगंगानगर की प्रीति कौर ने प्रथम, चूरू की कल्पना ने द्वितीय तथा राजसमंद की धर्मिष्ठा और कोटा की डॉली ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
27 किलोग्राम भारवर्ग में टोंक की रक्षिता प्रथम, बालोतरा की दीपिका द्वितीय तथा अजमेर की सिमरन सैनी और जयपुर की सनाया सिंह तृतीय रहीं।
44 किलोग्राम भारवर्ग में टोंक की प्रिय सैनी प्रथम, नागौर की ममता द्वितीय तथा चूरू की लक्ष्मी और अजमेर की जया भाटी तृतीय रहीं।
44 किलोग्राम से अधिक भारवर्ग में भीलवाड़ा की भावना विश्नोई प्रथम, अजमेर की तनु गुर्जर द्वितीय तथा नागौर की अंजू और जयपुर की अनुष्का जाट तृतीय रहीं।
32 किलोग्राम भारवर्ग में हनुमानगढ़ की लक्ष्मी ने स्वर्ण पदक जीता। चूरू की कल्पना ने रजत तथा बालोतरा की रोशनी और भीलवाड़ा की कृतिका ने कांस्य पदक हासिल किया।
36 किलोग्राम भारवर्ग में टोंक की कनिष्क कुंवर ने भरतपुर की छवि कुमारी को हराकर स्वर्ण पदक जीता। चूरू की अनिता और श्रीगंगानगर की दिव्या संयुक्त रूप से तृतीय रहीं।
छात्र वर्ग के परिणाम
25 किलोग्राम भारवर्ग में चूरू के रंजीत ने भीलवाड़ा के पवन माली को हराकर स्वर्ण पदक जीता। पवन माली द्वितीय रहे। उदयपुर के हिमांक सहलोत और बीकानेर के अमजद अली ने कांस्य पदक प्राप्त किया।
30 किलोग्राम भारवर्ग में कोटा के यथार्थ सुमन प्रथम, श्रीगंगानगर के अमित द्वितीय तथा सीकर के कुंदन जैन और उदयपुर के हार्दिक तृतीय रहे।
45 किलोग्राम भारवर्ग में भीलवाड़ा के धर्मेश ने प्रथम स्थान हासिल कर स्वर्ण पदक जीता। नागौर के विकास द्वितीय तथा उदयपुर के युवराज और कोटा के पारस तृतीय रहे।
50 किलोग्राम भारवर्ग में ब्यावर के फैजान ने टोंक के लक्की/युग को हराकर स्वर्ण पदक जीता। सीकर के लक्की गुर्जर और अजमेर के गजेन्द्र तृतीय रहे।
एक अन्य मुकाबले में जोधपुर के उमेश चौधरी ने स्वर्ण पदक जीता। बीकानेर के हरकिशन द्वितीय तथा टोंक के प्रतीक माधोवाल और भीलवाड़ा के आयुष खारोल तृतीय स्थान पर रहे।
खेलों से सर्वांगीण विकास पर जोर
कार्यक्रम संयोजक सोनिया राठौड़ और सह-संयोजक भानु प्रताप सुमन ने बताया कि 28 सितंबर से चल रही इस प्रतियोगिता में प्रदेशभर से आए खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
डायरेक्टर सोनिया राठौड़ ने कहा कि तनिष्क एज्यूकेशन वेलफेयर सोसायटी हमेशा से खेलों को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत रही है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ स्वदेशी खेलों पर भी ध्यान देना चाहिए। खेलों के माध्यम से विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास होता है तथा उनमें अनुशासन, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता विकसित होती है।
उन्होंने कहा कि खेल में हार-जीत अंतिम लक्ष्य नहीं है, बल्कि प्रतियोगिता से सीख लेकर आगे बढ़ना महत्वपूर्ण है। उन्होंने खिलाड़ियों के लिए बेहतर सुविधाएं
