नागरिक अभिव्यक्ति | सुल्तानपुर। प्रदेश में पंचायती राज चुनाव कार्यक्रम सामने आने के साथ ही सुल्तानपुर क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। दिए गए चुनाव कार्यक्रम के अनुसार सुल्तानपुर पंचायत समिति क्षेत्र में पहले चरण में मतदान होगा। यहां पंचायत समिति सदस्य की 21 और जिला परिषद सदस्य की 5 सीटों पर चुनाव होना है। चुनाव की घोषणा के साथ ही राजनीतिक दलों ने प्रत्याशियों के चयन और चुनावी समीकरणों पर काम शुरू कर दिया है।
इसी क्रम में भाजपा की ओर से रविवार दोपहर 3 बजे एसबीआई बैंक के पीछे स्थित गायत्री मंदिर में पंचायत चुनाव लड़ने के इच्छुक दावेदारों से आवेदन लिए जाएंगे। संभावित प्रत्याशी पहले से ही क्षेत्र में संपर्क अभियान तेज कर चुके हैं और जातीय, सामाजिक एवं स्थानीय समीकरणों को साधने में जुटे हैं।
8 अक्टूबर से शुरू होगी चुनाव प्रक्रिया
पहले चरण के लिए 8 अक्टूबर को अधिसूचना जारी होने के साथ चुनाव प्रक्रिया शुरू होगी। 23 अक्टूबर को जिला परिषद एवं पंचायत समिति सदस्यों के लिए मतदान होगा। इसके बाद 20 नवंबर को परिणाम घोषित किए जाएंगे। वहीं निर्वाचित सदस्यों के माध्यम से प्रधान और जिला प्रमुख के चुनाव 22 दिसंबर को होंगे।
मतदान से सत्ता गठन तक लंबा इंतजार
इस चुनाव कार्यक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा मतदान, परिणाम और प्रधान-प्रमुख के चुनाव के बीच लंबे अंतराल की है। 23 अक्टूबर को मतदान के बाद 20 नवंबर को परिणाम आएंगे, लेकिन पंचायत समिति और जिला परिषद की सत्ता का अंतिम स्वरूप 22 दिसंबर को होने वाले चुनावों के बाद ही स्पष्ट होगा। यानी मतदान के करीब दो महीने बाद प्रधान और जिला प्रमुख का चुनाव होगा।
यह लंबा अंतराल राजनीतिक दलों के लिए रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। परिणाम आने के बाद निर्वाचित सदस्यों को अपने पक्ष में एकजुट रखने और अंतिम समय तक राजनीतिक समीकरणों को बनाए रखने की चुनौती दलों के सामने रहेगी।
बाड़ाबंदी की चर्चाओं से बढ़ी सियासी हलचल
परिणाम और सत्ता गठन के बीच लंबे अंतराल ने क्षेत्र में संभावित बाड़ाबंदी की चर्चाओं को भी हवा दे दी है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि परिणाम आने के बाद प्रमुख दल अपने निर्वाचित सदस्यों को एकजुट रखने के लिए रणनीति बना सकते हैं। हालांकि अभी किसी राजनीतिक दल की ओर से बाड़ाबंदी को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
दीपावली के बीच बदलेंगे राजनीतिक समीकरण
इस चुनावी कार्यक्रम के दौरान 8 नवंबर को दीपावली है। ऐसे में 20 नवंबर को आने वाले परिणामों से पहले ही त्योहार के बीच राजनीतिक संपर्क और समीकरणों का दौर जारी रहने की संभावना है।
राजनीतिक दलों के सामने चुनाव प्रचार, दीपावली के दौरान जनसंपर्क और उसके बाद परिणाम तक संगठनात्मक सक्रियता बनाए रखने की चुनौती रहेगी। खासतौर पर परिणाम के बाद 22 दिसंबर तक निर्वाचित सदस्यों को साथ रखना सत्ता की दौड़ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अब सुल्तानपुर क्षेत्र में नजरें 8 अक्टूबर से शुरू होने वाली चुनाव प्रक्रिया, भाजपा में दावेदारों के आवेदनों और 21 पंचायत समिति तथा 5 जिला परिषद सीटों के लिए सामने आने वाले प्रत्याशियों पर टिकी हैं। टिकट वितरण के साथ ही क्षेत्र के राजनीतिक समीकरण और अधिक स्पष्ट होने की संभावना है।
