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केईडीएल की व्यवस्था पर ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर नाराज, उच्च स्तरीय जांच के निर्देश

कोटा के जीएसएस, बिजली लाइनों और ट्रांसफार्मरों का औचक निरीक्षण; बीकानेर और भरतपुर की फ्रेंचाइजी कंपनियों के कामकाज की भी होगी जांच

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केईडीएल की व्यवस्था पर ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर नाराज, उच्च स्तरीय जांच के निर्देश
केईडीएल की व्यवस्था पर ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर नाराज, उच्च स्तरीय जांच के निर्देश
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नागरिक अभिव्यक्ति | कोटा, 4 अक्टूबर। ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने शनिवार को कोटा शहर के विभिन्न ग्रिड सब-स्टेशन (जीएसएस), विद्युत लाइनों और ट्रांसफार्मरों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान बिजली वितरण का कार्य संभाल रही फ्रेंचाइजी कंपनी केईडीएल की व्यवस्थाओं और रखरखाव को लेकर मंत्री ने नाराजगी जताई। उन्होंने पूरे मामले की जयपुर स्तर से उच्च स्तरीय जांच कराने के लिए विशेष समिति गठित करने तथा जांच में सरकारी परिसंपत्तियों को नुकसान की पुष्टि होने पर संबंधित कंपनी से उसकी भरपाई कराने के निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधि और बिजली विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। इनमें विधायक संदीप शर्मा, भाजपा शहर जिलाध्यक्ष राकेश जैन, महापौर अनसूया गोस्वामी, उपमहापौर विवेक राजवंशी और पार्षद गोपाल राम मंडा शामिल रहे। विभागीय अधिकारियों में केईडीएल के टेक्निकल हेड कोड़ी वेंकटेशन, पीआरओ राजेश पटौदी, सीईओ मनीष अरोड़ा, जेवीवीएनएल के अधिशासी अभियंता आशीष जौहरी, टीए टू चीफ इंजीनियर हेमंत चतुर्वेदी, एईएन रविंद्र गौतम और जेईएन हिमांशु मौजूद रहे।

38 जीएसएस के रखरखाव पर उठाए सवाल

ऊर्जा मंत्री ने इंद्र विहार, संतोषी नगर, जवाहर नगर 33/11 केवी जीएसएस, तीन बत्ती सर्किल और वसंत विहार सहित विभिन्न क्षेत्रों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान सामने आई व्यवस्थाओं पर उन्होंने अधिकारियों से जानकारी ली।

मंत्री ने कहा कि सरकार की ओर से केईडीएल को रखरखाव के लिए सौंपे गए 38 जीएसएस में कई जगह अपेक्षित रखरखाव नजर नहीं आया। उन्होंने परिसर में झाड़-झंखाड़, साफ-सफाई की कमी और भवनों के रखरखाव को लेकर भी नाराजगी जताई। ट्रांसफार्मरों की सुरक्षा व्यवस्था तथा नियमित सेफ्टी ऑडिट को लेकर भी उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए।

मंत्री ने आरोप लगाया कि कंपनी ने पिछले 10 वर्षों में राजस्थान सरकार की परिसंपत्तियों के रखरखाव पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया, जिसके कारण उनकी स्थिति खराब हुई है। उन्होंने इस पूरे मामले की विस्तृत जांच कराने के निर्देश दिए।

वीसीआर में अनियमितताओं का भी मामला उठाया

निरीक्षण के दौरान मंत्री ने कंपनी की ओर से किए जाने वाले विजिलेंस चेकिंग रिपोर्ट (वीसीआर) के निस्तारण को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि यदि वीसीआर में गलत प्रविष्टियां की जा रही हैं या निर्धारित प्रक्रिया के बिना उनका निस्तारण किया जा रहा है, तो इसकी जांच आवश्यक है।

मंत्री ने कहा कि वीसीआर सेटलमेंट का अधिकार संबंधित जेवीवीएनएल के अधिशासी अभियंता के पास है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में कंपनी को पहले ही नोटिस जारी किया जा चुका है और मामले में कार्रवाई विचाराधीन है।

खुले बिजली पैनलों को लेकर भी जताई नाराजगी

निरीक्षण के दौरान कुछ स्थानों पर खुले पड़े बिजली पैनल भी नजर आए। इस पर मंत्री ने अधिकारियों से जवाब मांगा और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बिजली व्यवस्था से जुड़ी एजेंसी की पहली जिम्मेदारी उपभोक्ताओं के साथ-साथ बिजली ढांचे की सुरक्षा और समुचित रखरखाव सुनिश्चित करना है।

बीकानेर और भरतपुर की कंपनियों की भी होगी जांच

ऊर्जा मंत्री ने कहा कि कोटा में केईडीएल के कामकाज की जांच के साथ भरतपुर और बीकानेर में कार्यरत फ्रेंचाइजी कंपनियों के कामकाज की भी जयपुर स्तर से गठित विशेष टीम जांच करेगी। जांच में सामने आने वाले तथ्यों और रिपोर्ट के आधार पर संबंधित कंपनी के खिलाफ नियमानुसार कानूनी एवं प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा कि यदि जांच में पिछले 10 वर्षों के दौरान राजस्थान सरकार की परिसंपत्तियों को नुकसान पहुंचने की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार कंपनी से नुकसान की भरपाई कराने की कार्रवाई की जाएगी।

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लेखक

विशेष संवाददाता

नागरिक अभिव्यक्ति विशेष डिजिटल रिपोर्टर एवं विश्लेषक।

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