नागरिक अभिव्यक्ति | कोटा, 3 अक्टूबर। 72वें वन्यजीव सप्ताह के तहत शनिवार को मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के जैव-विविधता से समृद्ध क्षेत्र गराड़िया महादेव में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। दिन की शुरुआत वन भ्रमण से हुई, जिसमें मूक-बधिर बाल विकास केंद्र के विशेष बच्चों, विभिन्न महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं सहित करीब 200 वन्यजीव प्रेमियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
वन भ्रमण के दौरान प्रतिभागियों ने क्षेत्र की जैव-विविधता, वनस्पतियों और वन्यजीवों के प्राकृतिक रहवास को करीब से जाना। विशेष बच्चों की भागीदारी ने कार्यक्रम को समावेशी स्वरूप दिया। वन अधिकारियों ने प्रतिभागियों को वन्यजीव संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के महत्व की जानकारी भी दी।
भेड़िया संरक्षण पर हुई संगोष्ठी
वन्यजीव सप्ताह के तहत मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व की ओर से भेड़िया संरक्षण विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई। संगोष्ठी का नेतृत्व मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर एवं मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव, कोटा टी. मोहनराज तथा उप वन संरक्षक मुकुंदरा नेशनल पार्क मुथ्थु एस. ने किया।
संगोष्ठी में भारतीय ग्रे वुल्फ के संरक्षण, उसके प्राकृतिक रहवास और बदलते पर्यावरणीय परिदृश्य पर चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने भेड़ियों के संरक्षण के लिए वैज्ञानिक अध्ययन और स्थानीय स्तर पर संरक्षण प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया।
भारतीय ग्रे वुल्फ के व्यवहार और संरक्षण चुनौतियों पर चर्चा
संगोष्ठी के मुख्य वक्ता डॉ. धर्मेंद्र खंडाल ने भारतीय ग्रे वुल्फ के व्यवहार, प्राकृतिक आवास तथा मानव गतिविधियों के कारण उसके जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने भेड़ियों के संरक्षण से जुड़ी वर्तमान चुनौतियों पर भी चर्चा की।
डॉ. खंडाल ने बताया कि राजस्थान में देश की कुल भेड़िया आबादी का लगभग 16 प्रतिशत हिस्सा निवास करता है। उन्होंने कहा कि भेड़ियों के संरक्षण के लिए उनके प्राकृतिक आवासों को समझना, उनके व्यवहार का अध्ययन करना और वैज्ञानिक आधार पर संरक्षण रणनीति तैयार करना आवश्यक है।
हाड़ौती में संभावित भेड़िया रहवास क्षेत्र विकसित करने पर मंथन
संगोष्ठी के दौरान हाड़ौती क्षेत्र के वन क्षेत्रों में भेड़ियों के लिए संभावित रहवास क्षेत्र विकसित करने की रूपरेखा पर भी विचार-विमर्श किया गया। विशेषज्ञों ने संभावित क्षेत्रों की पहचान, उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों, वन्यजीवों के आवागमन तथा मानव गतिविधियों के प्रभाव जैसे पहलुओं को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिक अध्ययन की जरूरत बताई।
डॉ. खंडाल ने कहा कि भेड़ियों के प्राकृतिक आवासों की पहचान और उनके व्यवहार से जुड़े आंकड़ों का अध्ययन भविष्य में संरक्षण की बेहतर योजना तैयार करने में सहायक हो सकता है। इसके लिए लगातार शोध, निगरानी और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप संरक्षण उपायों को अपनाने पर जोर दिया गया।
वन्यजीव विशेषज्ञों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने लिया भाग
संगोष्ठी में उप वन संरक्षक वन्यजीव कोटा प्रमोद धाकड़, डॉ. सुधीर गुप्ता, सहायक वन संरक्षक, वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के प्रोफेसर, शोधार्थी, विद्यार्थी तथा वन्यजीव प्रेमी मौजूद रहे।
कार्यक्रम में करीब 200 प्रतिभागियों ने भाग लिया। वन्यजीव सप्ताह के तहत आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने, विद्यार्थियों और आमजन को जैव-विविधता से जोड़ने तथा क्षेत्र में संरक्षण आधारित शोध एवं गतिविधियों को प्रोत्साहित करना रहा।
स्रोत के अनुसार तारीख और वार ठीक करेंप्रतिभागियों की संख्या में एकरूपता रखें
