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आकृति से नहीं, प्रकृति से मानव बनना जरूरी : योगेश मुनि

सत्य, अहिंसा और अपरिग्रह जैसे सिद्धांतों से महात्मा गांधी ने स्वतंत्रता आंदोलन को दी नई दिशा

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आकृति से नहीं, प्रकृति से मानव बनना जरूरी : योगेश मुनि
आकृति से नहीं, प्रकृति से मानव बनना जरूरी : योगेश मुनि
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नागरिक अभिव्यक्ति | कोटा। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, रामपुरा के तत्वावधान में आचार्य भगवन 1008 श्री हीराचंद जी म.सा. एवं भावी आचार्य श्री महेंद्र मुनि जी म.सा. के आज्ञानुवर्ती संत रत्न पूज्य श्री नंदीषेण मुनि जी म.सा., पूज्य श्री योगेश मुनि जी म.सा. एवं पूज्य श्री जितेंद्र मुनि जी म.सा. आदि ठाणा-3 के सानिध्य में चातुर्मास तप एवं त्याग के साथ निरंतर चल रहा है। इसी क्रम में नियमित प्रवचन का आयोजन हुआ।

धर्मसभा को संबोधित करते हुए योगेश मुनि जी म.सा. ने कहा कि जीव की सर्वोत्तम सफलता मनुष्य भव को प्राप्त करना है। संसार में मनुष्य जन्म मिलना दुर्लभ है, लेकिन उससे भी अधिक कठिन मनुष्यता को प्राप्त करना है। उन्होंने कहा कि आकृति से मानव बनना सरल है, लेकिन प्रकृति से मानव बनना कठिन है। जो व्यक्ति अपने आचरण, व्यवहार और विचारों में मानवता को जीता है, वही महामानव बन जाता है।

उन्होंने कहा कि जहां विश्वास और प्रेम होता है, वहां विपरीत परिस्थितियों में भी अनुकूलता दिखाई देने लगती है। आपसी विश्वास रिश्तों को मजबूत करता है और प्रेम मन में अपनत्व का भाव पैदा करता है। व्यक्ति को केवल दूसरों के दोष देखने की आदत नहीं बनानी चाहिए, बल्कि उनमें मौजूद अच्छाइयों को पहचानने का प्रयास करना चाहिए।

मुनिश्री ने श्रद्धालुओं को समय का सदुपयोग करने, साधना के प्रति सजग रहने, मानवता के गुण विकसित करने तथा परिवार में प्रेम और विश्वास के साथ जीवन जीने का संदेश दिया।

जीवन में जितनी सादगी होगी, उतना ही तनाव कम होगा

श्री जितेंद्र मुनि जी म.सा. ने कहा कि महापुरुषों का जीवन समाज और मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत होता है। उनके जीवन से मिलने वाले संदेशों को आत्मसात कर व्यक्ति अपने जीवन को सुंदर और सार्थक बना सकता है।

उन्होंने कहा कि जैन धर्म व्यक्ति पूजा की बजाय गुण पूजा को महत्व देता है। व्यक्ति में विद्यमान सत्य, अहिंसा, संयम, त्याग और सद्गुणों का सम्मान करना ही वास्तविक गुण पूजा है। उन्होंने कहा कि सत्य, अहिंसा और अपरिग्रह जैसे सिद्धांतों को लेकर महात्मा गांधी ने स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी।

मुनिश्री ने कहा कि जीवन में जितनी सादगी होगी, उतना ही तनाव कम होगा। उन्होंने कहा कि जिनशासन का संदेश यही है कि टेंशन कम और समाधि ज्यादा हो। इसके लिए व्यक्ति को अपने समय और साधना के प्रति सजग रहना चाहिए। समय का सदुपयोग और आत्मचिंतन जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।

इस अवसर पर संघ के अध्यक्ष पंकज मेहता ने गांधी जयंती एवं शास्त्री जयंती का उल्लेख करते हुए कहा कि महापुरुषों ने हमेशा सत्य, त्याग, समर्पण और सादगी के साथ जीवन जिया और इसी कारण वे अमर हो गए। महात्मा गांधी एवं लाल बहादुर शास्त्री का जीवन सभी के लिए प्रेरणास्पद है।

संघ मंत्री अनिल दक ने बताया कि नियमित प्रवचनों के माध्यम से सदाचार, परिवार, धर्म, सत्य, अहिंसा और सकारात्मकता के साथ जीवन जीने का संदेश दिया जा रहा है।

संक्षिप्त और प्रभावी लीड बनाएंप्रवचन के मुख्य संदेश उभारेंदोहराव वाली बातें कम करें

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लेखक

विशेष संवाददाता

नागरिक अभिव्यक्ति विशेष डिजिटल रिपोर्टर एवं विश्लेषक।

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