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राष्ट्रीय रक्तदान दिवस आज: स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने की जरूरत

रक्त की उपलब्धता कई मरीजों के लिए जीवनरक्षक; पात्रता स्वास्थ्यकर्मी की जांच के बाद ही तय हो

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राष्ट्रीय रक्तदान दिवस आज: स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने की जरूरत
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नागरिक अभिव्यक्ति | कोटा

रक्त किसी कारखाने में तैयार नहीं होता और न ही इसका कृत्रिम विकल्प उपलब्ध है। दुर्घटना, प्रसव, ऑपरेशन, गंभीर बीमारी और थैलेसीमिया जैसी स्थितियों में मरीजों को रक्त की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में स्वैच्छिक रक्तदान से रक्त की नियमित उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलती है। राष्ट्रीय रक्तदान दिवस पर रक्तदान से जुड़ी भ्रांतियों को दूर कर समाज में वैज्ञानिक जानकारी और जिम्मेदार भागीदारी बढ़ाने की जरूरत है।

टीम जीवनदाता के संरक्षक एवं संयोजक भुवनेश गुप्ता ने कहा कि रक्तदान के बाद कुछ

सामान्य सावधानियां रखना जरूरी है। रक्तदान के तुरंत बाद कुछ समय आराम करें और रक्तदान केंद्र की सलाह के अनुसार अल्पाहार या तरल पदार्थ लें। पर्याप्त पानी पीना उपयोगी रहता है। उसी दिन भारी व्यायाम और कठिन शारीरिक श्रम से बचना चाहिए। यदि चक्कर, कमजोरी या असहजता महसूस हो तो रक्तदान केंद्र के कर्मचारियों को तुरंत बताएं। वाहन चलाने से पहले पूरी तरह सामान्य महसूस करना चाहिए।

रक्तदान से पहले केंद्र पर स्वास्थ्य संबंधी जानकारी ली जाती है और निर्धारित जांच की जाती है। दान किए गए रक्त की भी संक्रमण संबंधी जांच होती है, ताकि मरीजों को सुरक्षित रक्त उपलब्ध कराया जा सके। भारत सरकार के स्वैच्छिक रक्तदान दिशानिर्देशों में रक्तदाता की उपयुक्तता तय करने के लिए स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा चिकित्सकीय आकलन की व्यवस्था बताई गई है। इसलिए पात्रता का निर्णय स्वयं करने के बजाय रक्तदान केंद्र की जांच के बाद ही रक्तदान करना चाहिए।

भुवनेश गुप्ता ने बताया कि रक्तदान की पात्रता उम्र, वजन, हीमोग्लोबिन, स्वास्थ्य स्थिति, दवाओं और अन्य परिस्थितियों पर निर्भर करती है। गर्भावस्था, हाल में प्रसव, कुछ बीमारियों या दवाओं के सेवन जैसी स्थितियों में रक्तदान टालना पड़ सकता है। हाल में टैटू बनवाने या बीमारी से उबरने के बाद भी केंद्र की चिकित्सकीय सलाह जरूरी है। किसी व्यक्ति के लिए रक्तदान सुरक्षित है या नहीं, इसका अंतिम निर्णय प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी को करना चाहिए। भारत सरकार की गाइडलाइन में रक्तदान से पहले दाता की जांच और चिकित्सकीय आकलन का प्रावधान है।

ग्रामीण क्षेत्रों में रक्तदान को लेकर जानकारी की कमी और भ्रांतियां अब भी स्वैच्छिक भागीदारी में बाधा बनती हैं। स्वास्थ्य विभाग, सामाजिक संस्थाओं और रक्तदान संगठनों को गांवों में शिविरों के साथ संवाद और जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित करने चाहिए। स्कूल-कॉलेजों में निबंध, भाषण और चित्रकला जैसी गतिविधियों के जरिए युवाओं को रक्तदान का सामाजिक और वैज्ञानिक महत्व बताया जा सकता है। नाबालिग बच्चों को रक्तदान नहीं करना चाहिए, लेकिन उन्हें इसके महत्व की जानकारी दी जा सकती है, ताकि वे वयस्क होने पर जागरूक निर्णय लें।

औद्योगिक क्षेत्रों, कार्यालयों और दुकानों में सूचना सामग्री लगाकर तथा नियमित स्वैच्छिक रक्तदान शिविर आयोजित कर अधिक लोगों तक संदेश पहुंचाया जा सकता है। स्वस्थ और पात्र व्यक्ति का स्वैच्छिक रक्तदान किसी जरूरतमंद मरीज के उपचार में अहम योगदान दे सकता है। राष्ट्रीय रक्तदान दिवस का संदेश है कि भय और भ्रांतियों के बजाय सही जानकारी, स्वैच्छिक भागीदारी और सामाजिक जिम्मेदारी को बढ़ावा दिया जाए।

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लेखक

विशेष संवाददाता

नागरिक अभिव्यक्ति विशेष डिजिटल रिपोर्टर एवं विश्लेषक।

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