बूंदी, 13 अक्टूबर | नागरिक अभिव्यक्ति। नवनेरा-गलवा-बीसलपुर-ईसरदा लिंक परियोजना के तहत अधिग्रहित भूमि पर कृषि गतिविधियां करने वालों के खिलाफ नियमानुसार राजकीय कार्रवाई की जाएगी। राजस्थान वाटर ग्रिड कॉरपोरेशन लिमिटेड, पीआईयू कोटा ने प्रभावित किसानों और भूमि हितधारियों को अवाप्त की जा चुकी जमीन पर खेती नहीं करने के निर्देश दिए हैं।
राजस्थान वाटर ग्रिड कॉरपोरेशन लिमिटेड, पीआईयू कोटा के महाप्रबंधक प्रदीप कुमार गुप्ता ने बताया कि नवनेरा बैराज के डिलीवरी सिस्टम से मेज एनीकट तक विभिन्न संरचनाओं सहित फीडर निर्माण परियोजना के लिए गुहाटा, कोटाखुर्द, लबान, दहीखेड़ा, डपटा, रामगंज और खरायता गांवों में भूमि अवाप्त की गई है।
भूमि का मुआवजा भुगतान किया जा चुका है
महाप्रबंधक ने बताया कि भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर एवं पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 के तहत उपखंड अधिकारी, लाखेरी की ओर से 28 मई 2025 को भूमि अवाप्ति का अवार्ड जारी किया गया था। प्रभावित भूमि के मुआवजे का भुगतान किया जा चुका है, जबकि शेष मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अधिग्रहित भूमि राज्य हित में सार्वजनिक प्रयोजन के लिए निर्धारित है।
जुताई, बुवाई और फसल उगाने पर रोक
गुप्ता ने बताया कि मुआवजा प्राप्त कर चुके तथा मुआवजा नहीं लेने वाले सभी काश्तकारों और प्रभावित भूमि हितधारियों को अधिग्रहित भूमि पर कृषि संबंधी गतिविधियां नहीं करनी हैं। इसमें खेत तैयार करना, जुताई करना, खाद और बीज डालना, फसल बोना तथा फसल उगाना जैसे कार्य शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि विभाग की ओर से पहले भी समय-समय पर इस संबंध में सूचना दी जाती रही है। इसके बावजूद यदि अधिग्रहित भूमि पर कृषि गतिविधियां की जाती हैं और परियोजना के निर्माण कार्य के दौरान उस भूमि या फसल को किसी प्रकार का नुकसान होता है, तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित भूमि हितधारियों की स्वयं की होगी।
नियमों के तहत होगी कार्रवाई
महाप्रबंधक ने प्रभावित किसानों से निर्देशों की पालना करने और अधिग्रहित भूमि पर खेती नहीं करने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्देशों का उल्लंघन किए जाने पर संबंधित लोगों के विरुद्ध नियमानुसार राजकीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
