नागरिक अभिव्यक्ति । धर्म-संस्कृति
शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन सोमवार, 12 अक्टूबर को मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जा रही है। नवरात्रि के नौ दिनों में प्रत्येक दिन देवी के एक स्वरूप की आराधना की परंपरा है। पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा के बाद दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की उपासना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं में देवी का यह स्वरूप तपस्या, संयम, धैर्य और दृढ़ संकल्प का प्रतीक माना गया है। भक्त मां की आराधना कर जीवन में आत्मबल, शांति और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति की कामना करते हैं।
कौन हैं मां ब्रह्मचारिणी?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी देवी पार्वती का तपस्विनी स्वरूप हैं। मान्यता है कि भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए माता पार्वती ने कठोर तपस्या की थी। उनकी साधना, समर्पण और अटूट संकल्प को मां ब्रह्मचारिणी के स्वरूप से जोड़कर देखा जाता है।
माता के एक हाथ में जपमाला और दूसरे हाथ में कमंडल रहता है। उनका स्वरूप सादगी, साधना और आत्मसंयम का संदेश देता है। धार्मिक विश्वास के अनुसार, उनकी पूजा करने से भक्तों को धैर्य बनाए रखने, अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने और कठिन समय में विचलित न होने की प्रेरणा मिलती है।
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि
नवरात्रि के दूसरे दिन सुबह स्नान कर पूजा स्थल की सफाई करें। मां दुर्गा के स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक प्रज्वलित करें। इसके बाद पुष्प, अक्षत, धूप और दीप अर्पित कर श्रद्धापूर्वक पूजा करें। मां को चीनी या मिश्री का भोग लगाने की परंपरा है। कुछ परिवार अपनी मान्यताओं के अनुसार फल और अन्य सात्विक प्रसाद भी अर्पित करते हैं।
पूजा के दौरान मां ब्रह्मचारिणी के मंत्र का जाप कर आरती की जाती है। नवरात्रि का व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी पारिवारिक परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार उपवास करते हैं। पूजा की विधि अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में कुछ भिन्न हो सकती है।
मां ब्रह्मचारिणी का मंत्र
नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना के लिए इस मंत्र का जाप किया जाता है।
“ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥”
धार्मिक मान्यता के अनुसार, मंत्र जाप मन को एकाग्र करने और साधना में ध्यान लगाने का माध्यम है। श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार 11, 21 या 108 बार मंत्र का जाप कर सकते हैं।
दूसरे दिन सफेद रंग का महत्व
नवरात्रि के दूसरे दिन सफेद रंग को विशेष महत्व दिया जाता है। इसे शांति, पवित्रता, सादगी और सकारात्मकता से जोड़कर देखा जाता है। मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप भी प्रायः श्वेत वस्त्रों में दर्शाया जाता है। इस कारण कई श्रद्धालु दूसरे दिन सफेद रंग के वस्त्र पहनकर पूजा करते हैं। हालांकि, नवरात्रि के रंगों की परंपरा अलग-अलग क्षेत्रों और पंचांगों के अनुसार बदल सकती है।
मां ब्रह्मचारिणी की आराधना से क्या संदेश मिलता है?
नवरात्रि के दूसरे दिन का प्रमुख संदेश धैर्य और निरंतर प्रयास से जुड़ा है। मां ब्रह्मचारिणी की तपस्या की कथा भक्तों को सिखाती है कि कठिनाइयों के सामने अपने संकल्प को कमजोर नहीं पड़ने देना चाहिए। किसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए अनुशासन, धैर्य और निरंतर मेहनत जरूरी है।
शारदीय नवरात्रि का यह पर्व 11 अक्टूबर से शुरू होकर 19 अक्टूबर तक चलेगा। इसके बाद 20 अक्टूबर को विजयादशमी मनाई जाएगी। नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा के साथ देशभर में धार्मिक अनुष्ठान, भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
