नागरिक अभिव्यक्ति । राजस्थान
शारदीय नवरात्रि के चौथे दिन बुधवार, 14 अक्टूबर को मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा की पूजा-अर्चना की जा रही है। नवरात्रि के प्रत्येक दिन देवी के अलग-अलग स्वरूप की आराधना का विधान है। चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्मांडा अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना करने वाली देवी हैं। उन्हें सृष्टि में ऊर्जा और प्रकाश का संचार करने वाली आदिशक्ति के रूप में भी पूजा जाता है।
मां कूष्मांडा का स्वरूप तेजस्वी और दिव्य माना गया है। उन्हें अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है। धार्मिक चित्रण में उनकी आठ भुजाओं में कमंडल, धनुष, बाण, कमल, अमृत कलश, जपमाला, चक्र और गदा दर्शाए जाते हैं। उनका वाहन सिंह है। मान्यता है कि मां की आराधना से भक्तों को साहस, सकारात्मक ऊर्जा, सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है।
पूजा में फूल, अक्षत, धूप-दीप और फल अर्पित किए जाते हैं। मां कूष्मांडा को मालपुआ, हलवा, नारियल और अन्य मिष्ठान का भोग लगाने की परंपरा है। व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी पारिवारिक परंपरा और नियमों के अनुसार फलाहार करते हैं। पूजा के दौरान मां के मंत्रों का जाप और आरती कर परिवार की सुख-शांति तथा खुशहाली की कामना की जाती है।
मां कूष्मांडा का मंत्र ‘ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः’ है। श्रद्धालु पूजा के दौरान इस मंत्र का जाप कर सकते हैं। नवरात्रि के चौथे दिन का संबंध सृजन, ऊर्जा और प्रकाश की भावना से भी जोड़ा जाता है। इस दिन भक्त मां के प्रति श्रद्धा प्रकट करते हुए अपने जीवन में सकारात्मकता, आत्मविश्वास और नई ऊर्जा की कामना करते हैं।
नवरात्रि केवल पूजा-अर्चना का पर्व नहीं, बल्कि संयम, संकल्प और आत्मबल को मजबूत करने का अवसर भी है। मां कूष्मांडा की आराधना के साथ श्रद्धालु नवरात्रि के आध्यात्मिक संदेश को जीवन में अपनाने का संकल्प लेते हैं।
