ADVERTISEMENT
ब्रेकिंग न्यूज़
• हाड़ौती अंचल: कोटा में नए रिवरफ्रंट प्रोजेक्ट के लिए 120 करोड़ का अतिरिक्त बजट स्वीकृत • चुनाव आयोग ने आगामी निकाय चुनाव हेतु वोटर लिस्ट अपडेशन की समय सीमा बढ़ाई • राजस्थान बोर्ड परीक्षा 2026 की समय सारिणी घोषित, शिक्षा विभाग की बड़ी तैयारी • टी20 वर्ल्ड कप: भारतीय टीम ने दूसरे मुकाबले में भी दर्ज की धमाकेदार जीत
नागरिक अभिव्यक्ति
होम / हाड़ौती अंचल / लेख विस्तार
हाड़ौती अंचल

7 दिनों में कैसे करवाया 31 तालाबों का निर्माण, नहीं बता पा रहे अफसर

आरटीआई कानून | आयोग पर भारी अफसर, 1 वर्ष बाद भी नहीं दी सूचना

संवाददाता
विशेष संवाददाता विशेष रिपोर्टर
अक्षर आकार:
7 दिनों में कैसे करवाया 31 तालाबों का निर्माण, नहीं बता पा रहे अफसर
7 दिनों में कैसे करवाया 31 तालाबों का निर्माण, नहीं बता पा रहे अफसर
ADVERTISEMENT
खबर शेयर करें:

कोटा जिले की कनवास रेंज में महज 7 दिनों के भीतर 31 तालाबों का निर्माण कर 58.37 लाख का बजट उठाने के मामले में अफसर जांच के दायरे में गए हैं। विभाग पर आरटीआई (सूचना के अधिकार) कानून के तहत मांगी गई महत्वपूर्ण सूचना को रोकने और पारदर्शिता के नियमों की अवहेलना करने के गंभीर आरोप हैं। जो सूचना नियमानुसार 30 दिनों के भीतर देनी होती है, वह एक वर्ष बीत जाने के बाद भी दी गई।

तलवंडी निवासी आरटीआई कार्यकर्ता केशव तिवारी ने 28 जुलाई 2025 को उपवन संरक्षक कार्यालय, कोटा में आवेदन प्रस्तुत कर उक्त तालाब निर्माण कार्यों से जुड़े निविदा, कार्यादेश और भुगतान से संबंधित आधिकारिक दस्तावेज मांगे थे। सूचना मिलने पर 20 सितंबर को प्रथम और 2 नवंबर को द्वितीय अपील की गई, परंतु कोई जानकारी नहीं दी गई। 16 दिसंबर 2025 को राजस्थान राज्य सूचना आयोग ने इस प्रशासनिक लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए अपीलार्थी को निशुल्क रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के आदेश जारी किए। राज्य सूचना आयुक्त सुनील शर्मा ने निर्देशित किया था कि 21 दिनों के भीतर अपीलार्थी को कार्यालय आमंत्रित कर मूल रिकॉर्ड का भौतिक अवलोकन कराया जाए और वांछित प्रतियां निशुल्क उपलब्ध कराई जाएं। इस आदेश को जारी हुए भी कई महीने बीत चुके हैं, लेकिन सूचना नहीं दी गई।

एसपी कोटा के माध्यम से तामील करवाया गया समन

आयोग के आदेश की पालना होने पर धारा 18 (3) आरटीआई एक्ट के तहत 'व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने का समन' जारी किया गया है। आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, पीड़ित द्वारा 17 अप्रैल 2026 को दर्ज कराए गए परिवाद पर संज्ञान लेते हुए आयोग ने यह सख्त रुख अपनाया है। मई 2026 में यह कानूनी समन पुलिस अधीक्षक (एसपी) कोटा तेजस्विनी गौतम के कार्यालय के माध्यम से संबंधित अधिकारी को तामील कराया गया। इसके तहत लोक सूचना अधिकारी को 10 जुलाई 2026 को पूर्वान्ह 11:00 बजे आयोग के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के लिए पाबंद किया गया था। आयोग ने स्पष्ट चेतावनी दी थी कि आगामी तिथि पर अनुपस्थिति रहने की स्थिति में कानून सम्मत कठोर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इधर, परिवादी तिवारी का कहना है कि यह सूचना जनहित की है। 10 जुलाई को वो आयोग में उपिस्थत हुए, लेकिन अफसर नहीं आए। अभी तक कोई सूचना भी नहीं दी गई हैं। अगर सूचना नहीं दी तो वे हाईकोर्ट जाएंगे।

यह है मामला : 7 दिन में 6 गांवों में 31 तालाबों का निर्माण दर्शाया

कोटा जिले की कनवास रेंज में वन विभाग द्वारा मार्च 2025 में तालाब निर्माण कार्य करवाए जाने के दस्तावेज तैयार किए गए थे। रिकॉर्ड के अनुसार, डाबरीकलां, दिल्लीपुरा, बोरनाखुर्द, विजयपुर, रसकपुरिया और गुरायता के विभिन्न क्षेत्रों में 31 तालाबों की खुदाई कर 58.37 लाख रुपए का व्यय दिखाया गया। वित्तीय वर्ष की समाप्ति (बजट लैप्स होने) से ठीक पहले, यह संपूर्ण प्रक्रिया 21 से 29 मार्च 2025 के बीच मात्र 7 दिनों में पूर्ण होना दर्शाई गई। जबकि तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि मात्र 7 दिनों के भीतर 6 अलग-अलग गांवों में 31 तालाबों के निर्माण हेतु 57,174 घन मीटर मिट्टी की खुदाई करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं। इस पैमाने पर कार्य करने के लिए प्रतिदिन 8 से 10 घंटे तक लगभग 90 जेसीबी मशीनों का निरंतर संचालन, 8,168 घन मीटर मिट्टी का उत्खनन और परिवहन के लिए कम से कम 60 डंपरों की आवश्यकता होगी। साथ ही, इतनी बड़ी संख्या में ऑपरेटर, ड्राइवर, श्रमिक और साइट इंजीनियर्स की उपलब्धता भी संदेहास्पद है।

ADVERTISEMENT
लेखक

विशेष संवाददाता

नागरिक अभिव्यक्ति विशेष डिजिटल रिपोर्टर एवं विश्लेषक।

comment पाठकों की प्रतिक्रिया (Comments)

अपनी राय दर्ज करें: