कोटा की पहचान केवल कोचिंग और चंबल नदी तक सीमित नहीं है। हाड़ौती की औद्योगिक प्रगति में भी ऐसे प्रतिष्ठानों का अहम योगदान है, जिन्होंने क्षेत्र को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के साथ हजारों परिवारों की आजीविका को मजबूती दी है। गड़ेपान स्थित चम्बल फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड (सीएफसीएल) ऐसा ही एक प्रतिष्ठित प्रतिष्ठान है, जिसने हाड़ौती को देश के उर्वरक उद्योग में एक विशिष्ट पहचान दिलाई है। 1993 में शुरू हुआ यह सफर आज लगभग 20 हजार करोड़ के वार्षिक टर्नओवर तक पहुंच चुका है। यहां करीब 3 हजार लोगों को प्रत्यक्ष तथा 8 से 10 हजार लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है। परिवहन, निर्माण, ठेका सेवाओं, कृषि परामर्श और स्थानीय व्यापार सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े 10 हजार से अधिक परिवारों की आजीविका किसी न किसी रूप में इस उद्योग से जुड़ी है। करीब 1,200 एकड़ में फैला गड़ेपान उर्वरक परिसर भारत के सबसे आधुनिक उर्वरक परिसरों में शामिल है। यहां संचालित गड़ेपान-I, II और III तीन अत्याधुनिक यूरिया संयंत्रों की संयुक्त वार्षिक उत्पादन क्षमता लगभग 34 लाख मीट्रिक टन है। देश के कुल यूरिया उत्पादन में कंपनी की करीब 13% हिस्सेदारी है, जो इसे निजी क्षेत्र की अग्रणी उर्वरक निर्माता कंपनियों में स्थापित करती है। हाल ही में टेक्निकल अमोनियम नाइट्रेट संयंत्र के सफल संचालन के साथ कंपनी ने औद्योगिक और खनन क्षेत्र में भी अपनी उपस्थिति मजबूत की है। करीब तीन दशक में सीएफसीएल ने यह साबित किया है कि आधुनिक तकनीक, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक दायित्व के साथ उद्योग केवल उत्पादन का केंद्र नहीं बनते, बल्कि पूरे क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास की धुरी भी बन सकते हैं। आज गड़ेपान का यह औद्योगिक परिसर हाड़ौती के गौरव और भारत की कृषि शक्ति का महत्वपूर्ण आधार है।
2 लाख पेड लगाएं, 57 स्कूल गोद लिए
पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक दायित्व चम्बल फर्टिलाइजर्स की पहचान बनी हुई हैं। ऊर्जा दक्ष तकनीक, जल पुनर्चक्रण, ऑनलाइन उत्सर्जन निगरानी, सौर ऊर्जा और अपशिष्ट प्रबंधन जैसी पहलों के साथ कंपनी ने करीब 2 लाख वृक्ष-पौधों की हरियाली विकसित की। वहीं, सीएसआर के तहत 57 सरकारी विद्यालयों में शिक्षा सुधार, स्मार्ट क्लास, स्वास्थ्य शिविर, मातृ-शिशु स्वास्थ्य, 'सीड टू हार्वेस्ट'अभियान, कौशल विकास और महिला सशक्तिकरण जैसे कार्यक्रमों से हजारों लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है।
