दीगोद (कोटा): पीपल्दा विधानसभा क्षेत्र के पीड़ित किसानों ने विधायक चेतन पटेल कोलाना के नेतृत्व में अपने हक और और अधिकारों की रक्षा के लिए आयोजित ऐतिहासिक आंदोलन को 'किसान न्याय क्रान्ति' का नाम दिया, जिसके तहत विशाल ट्रेक्टर रैली निकालकर दीगोद उपखण्ड अधिकारी कार्यालय का घेराव किया गया। क्षेत्र में लंबे समय से खाद की किल्लत, जबरन अटैचमेंट, स्मार्ट मीटर धांधली, फलल बीमा क्लेम, इटावा मंडी के 102 किसानों का बकाया 146 लाख रूपये का भुगतान, तारबंदी व कृषि यंत्र सब्सिडी, कैटलशेड व शौचालय भुगतान और नरेगा श्रमिकों के बकाएं को लेकर ठगा सा महसूस कर रहें किसानों का आक्रोश 17 अगस्त को सड़कों पर फूट पड़ा। इस आंदोलन में विधायक चेतन पटेल कोलाना सहित कांग्रेस पार्टी के जनप्रतिनिधि, नेतागण, पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं अनेक पीडित किसान शामिल हुए। इस आंदोलन की सबसे खास बात यह भी रही कि कांगेस के साथ- साथ इसमें 'अखिल भारतीय किसान महासभा' संगठन के जिलाध्यक्ष रामप्रसाद परालिया सहित संगठन के तमाम किसान भी कंधे से कंधा मिलाकर किसान न्याय क्रान्ति' में शामिल हुए। सुबह 11 बजे गावं कोलाना से आंदोलन का आगाज हुआ, जिसमें इटावा खातौली सहित पूरे पीपल्दा विधानसभा क्षेत्र के दूर दूर से पधारे किसानों का अपार हुजूम, मोटरसाईकिल का विशाल काफिला और ट्रेक्टरो की कई किलोमीटर लंबी कतारें देखने को मिलीं।
विशाल रैली जब दीगोद उपखण्ड कार्यालय पहुंची तो चारों तरफ ट्रेक्टर ही ट्रेक्टर नजर आने लगे। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए भारी पुलिस जाब्ता तैनात था और मौके पर संयुक्त निदेशक (कृषि) कोटा, प्रबंध निदेशक (केन्द्रीय सहकारी बैंक) कोटा, उप रजिस्ट्रार (सहकारीता) कोटा, उपखण्ड अधिकारी दीगोद व इटावा, विकास अधिकारी सुल्तानपुर व इटावा तथा अधिशाषी अभियंता (बिजली विभाग) कोटा ग्रामीण सहित समस्त प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहें। परिसर में गूंजती जोरदार नारेबाजी के बीच सबसे प्रमुख मुद्दा खाद पर जबरन अटैचमेंट का उठा; किसानो ने आक्रोश जताते हुए कहा कि पूर्व में प्रशासन द्वारा केवल मौखिक आश्वासन दिए गए जिन पर लगातार वादाखिलाफी होती रही है इसलिए इस बार केवल आश्वासन नही बल्कि जवाबदेही तय करनी होगी। किसानो ने सवाल उठाया कि जब सरकार व रसद विभाग द्वारा डीएपी व यूरिया भेजा जा रहा है और अटैचमेंट लगाना नियमों के विरूद्ध है तो फिर समितियों व डीलरों द्वारा जबरन अटैचमंट क्यों दिया जा रहा है किसानो ने सख्त रुख अपनाते हुए शर्त रखी कि पहले प्रशासन यह घोषणा करें कि किसी भी सहकारी समिति या डीलर पर अटैचमेन्ट नही दिया जाएगा और यदि वादाखिलाफी होती है तो किस संबंधित अधिकारी की प्रत्यक्ष जवाबदेही तय कर उस पर दंडात्मक कार्यवाही की जाएगी।
आक्रोशित किसानों ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी कि जब तक प्रशासन खाद के साथ जबरन अटैचमेंट की रोकथाम और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही की सार्वजनिक घोषणा नहीं करता तब तक किसानों कि अन्य मांगो पर कोई वार्ता शुरू नही की जाएगी एवं किसान अपनी मांगो को लेकर घेराव स्थल दिगोद से किसानो कि विशाल ट्रेक्टर रैली कोटा कलेक्ट्रेट की आ तरफ कूच करेंगी। किसानो के कडे आक्रोश के आगे झुकते हुए प्रशासन ने मौके पर ही घोषणा की कि पीपल्दा क्षेत्र में कही भी डीएपी व यूरिया के साथ जबरन अटैचमेन्ट नही दिया जाएगा तय सरकारी रेट पर ही खाद मिलेगी तथा कालाबाजारी रोकने हेतु प्रशासन पूरी तरह प्रतिबद्ध है इस मुख्य मांग पर सहमति के बाद, किसानो की अन्य सभी लंबित मांगो पर भी अधिकारीयों के साथ सकारात्मक चर्चा हुई और तय समय-सीमा में समस्याओं के निस्तारण का ठोस प्रशासनिक आश्वासन दिया गया। इसके पश्चात विधायक चेतन पटेल कोलाना जिलाध्यक्ष रामप्रसाद परालिया जिला अध्यक्ष भानु प्रताप उपमहापौर पवन मीणा ब्लॉक अध्यक्ष ओमप्रकाश बैरवा महेंद्र गुर्जर हरिप्रकाश शर्मा व किसान प्रतिनिधियों ने अपना ज्ञापन सौंपा और स्पष्ट चेतावनी दी की यदि इस बार भी वादाखिलाफी हुई तो अगला कदम सीधे कोटा कलेक्ट्रेट का घेराव होगा जिसके बाद ही धरना समाप्त हुआ।
