नागरिक अभिव्यक्ति । बूंदी
कोरोना महामारी ने छोटे कारोबारियों की आर्थिक कमर तोड़ दी थी। पूंजी की कमी और ऊंचे ब्याज पर कर्ज लेने की मजबूरी के बीच कई लोगों के लिए परिवार का खर्च चलाना भी चुनौती बन गया था। बूंदी के अजय भी इसी मुश्किल दौर से गुजरे, लेकिन पीएम स्वनिधि योजना से मिले आर्थिक सहयोग ने उनके कारोबार को फिर से खड़ा करने में मदद की।
अजय कई वर्षों से गवर्नमेंट कॉलेज, देवपुरा के पास फास्ट फूड का ठेला लगाकर परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई। कारोबार के लिए जरूरी सामान खरीदने तक की पूंजी नहीं बची। ऐसे में उन्हें ऊंचे ब्याज पर उधार लेना पड़ता था। कमाई का बड़ा हिस्सा ब्याज चुकाने में खर्च होने से कारोबार को आगे बढ़ाना मुश्किल हो रहा था।
इसी दौरान नगर परिषद बूंदी के माध्यम से उन्हें प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) योजना की जानकारी मिली। अजय ने योजना के तहत आवेदन किया और ऋण मिलने के बाद अपने कारोबार को दोबारा व्यवस्थित किया। समय पर ऋण चुकाने के बाद उन्होंने दूसरे ऋण के लिए 20 हजार रुपए का आवेदन किया। इस आर्थिक सहायता से उन्हें कारोबार के लिए अतिरिक्त सामान जुटाने और ग्राहकों की जरूरत के मुताबिक स्टॉक रखने में मदद मिली।
अजय ने डिजिटल भुगतान को भी अपनाया। इससे ग्राहकों को भुगतान की सुविधा मिली और उनके कारोबार को आगे बढ़ाने में सहारा मिला। नियमित मेहनत और समय पर ऋण चुकाने की आदत ने उनके लिए आगे की राह आसान की। कारोबार में प्रगति और बेहतर पुनर्भुगतान रिकॉर्ड के आधार पर उन्हें आगे चलकर 50 हजार रुपए का ऋण भी मिला। फिलहाल वे इस ऋण का पुनर्भुगतान कर रहे हैं। उनके अच्छे रिकॉर्ड के आधार पर वे पीएम स्वनिधि क्रेडिट कार्ड के लिए भी पात्र बने।
अजय का अनुभव बताता है कि छोटे कारोबारियों के लिए समय पर मिलने वाली वित्तीय सहायता कितनी अहम हो सकती है। पूंजी की कमी के कारण कारोबार रोकने या महंगे कर्ज के जाल में फंसने की आशंका के बीच ऐसी योजनाएं उन्हें अपना काम जारी रखने और धीरे-धीरे आगे बढ़ने का अवसर देती हैं।
अजय के शब्दों में, “पीएम स्वनिधि योजना ने मेरे व्यवसाय को नई दिशा दी है और मुझे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने में मदद की है।”
अजय का सफर इस बात का उदाहरण है कि सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर छोटे कारोबारी विपरीत परिस्थितियों से उबरने की कोशिश कर सकते हैं। उनके लिए यह सहायता केवल ऋण तक सीमित नहीं रही, बल्कि कारोबार को व्यवस्थित करने, महंगे उधार पर निर्भरता घटाने और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का माध्यम बनी।
