राजस्थान में लंबे समय से लंबित नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव अब तय समयसीमा की ओर बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में शपथ-पत्र के जरिए चुनाव कार्यक्रम का रोडमैप प्रस्तुत कर दिया है। अदालत ने भी स्पष्ट कर दिया है कि 15 नवंबर 2026 तक हर हाल में दोनों चुनावों की प्रक्रिया पूरी की जाए। इसके बाद प्रदेश की राजनीति में चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है।
सरकार की ओर से पेश प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार नगरीय निकाय चुनाव की घोषणा 17 अगस्त को होगी। नामांकन प्रक्रिया अगस्त के अंतिम सप्ताह में पूरी होने के बाद 6 और 9 सितंबर को दो चरणों में मतदान तथा 11 सितंबर को मतगणना प्रस्तावित है। इसके बाद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव कराए जाएंगे। इसके तुरंत बाद पंचायत चुनाव की प्रक्रिया शुरू होगी। 23 सितंबर को अधिसूचना जारी होने के बाद चार चरणों में मतदान होगा और 12 नवंबर तक जिला परिषद एवं पंचायत समिति चुनावों की मतगणना पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार ने हाईकोर्ट को बताया है कि पूरी चुनावी प्रक्रिया 15 नवंबर तक समाप्त कर दी जाएगी। निकाय चुनाव प्रदेश के 309 नगरीय निकायों, 10,245 वार्डों और करीब 1.43 करोड़ मतदाताओं को कवर करेंगे। दो चरणों में चुनाव कराने के लिए प्रत्येक चरण में लगभग 60 हजार कार्मिक और 50 हजार पुलिसकर्मियों की जरूरत होगी।
संगठनात्मक तैयारियां तेज
राजनीतिक दृष्टि से यह चुनाव बेहद अहम माने जा रहे हैं। कांग्रेस अब तक सरकार पर चुनाव टालने का आरोप लगाती रही है, जबकि भाजपा इसे समयबद्ध प्रक्रिया बता रही है। हाईकोर्ट में सरकार की ओर से समयसीमा तय किए जाने के बाद अब दोनों दलों ने संगठनात्मक तैयारियां तेज कर दी हैं। उम्मीदवारों के चयन, आरक्षण और ओबीसी आयोग की रिपोर्ट पर भी राजनीतिक दलों की नजरें टिकी हैं। शहरी सरकारों के गठन से पहले होने वाला यह चुनाव आगामी पंचायत चुनावों के लिए भी राजनीतिक माहौल तय करेगा।
