सुल्तानपुर को जाम से राहत दिलाने के लिए बनाया जा रहा 28.50 करोड़ रुपए का 6 किलोमीटर लंबा बाईपास खुद सुस्त रफ्तार में फंस गया है। 2021 में घोषित और सितंबर 2023 में शुरू हुई यह परियोजना अब भी अधूरी है। मानसून सिर पर है, ऐसे में निर्माण फिर प्रभावित होने की आशंका है। पीडब्ल्यूडी निर्माण एजेंसी को नोटिस दे चुका है, लेकिन इसके बावजूद निर्माण की रफ्तार अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच सकी है। उधर, सड़क पूरी होने से पहले ही इसके दोनों ओर प्लॉटिंग तेज हो गई है और नई कॉलोनियां बसने लगी हैं। दरअसल, कोटा-श्योपुर स्टेट हाईवे-70 पर बढ़ते यातायात दबाव और जाम से राहत के लिए तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने 2021 के बजट में बाईपास की घोषणा की थी। प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रियाओं के चलते करीब दो साल बाद 21 सितंबर 2023 को तत्कालीन विधायक रामनारायण मीणा ने इसका शिलान्यास किया। दूसरे फेज में भाजपा देहात जिला अध्यक्ष प्रेम गौचर ने राज्य सरकार से 8.50 करोड़ पास करवाकर काम शुरू करवाया।
बिना भूमि उपयोग परिवर्तन
के प्लॉटिंग हो रही
सुल्तानपुर बाईपास का निर्माण अभी अधूरा है, लेकिन इसके दोनों ओर जमीन का कारोबार चल रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई स्थानों पर कृषि भूमि को बिना भूमि उपयोग परिवर्तन और विभागीय स्वीकृति के प्लॉटों में तब्दील कर बेचा जा रहा है। सड़क, बिजली और भविष्य में बढ़ती कीमतों का लालच देकर निवेशकों को आकर्षित किया जा रहा है, जबकि कई जगह मकानों का निर्माण भी शुरू हो चुका है। बाईपास की घोषणा के बाद जमीनों के दाम बढ़ने से कॉलोनाइजरों की सक्रियता बढ़ी है। वहीं, सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण और अवैध कब्जों की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने जांच और कार्रवाई नहीं की तो बाईपास के आसपास अनियोजित बसावट भविष्य में नई यातायात और शहरी समस्याएं खड़ी कर सकती है।
बाईपास के लिए 180 किसानों की जमीन अधिग्रहित, 5 करोड़ मुआवजा बांटा
बाईपास निर्माण के लिए करीब 180 किसानों की भूमि का अधिग्रहण किया गया है, जिसके एवज में लगभग 5 करोड़ रुपये का मुआवजा वितरित किया जा चुका है। परियोजना के तहत सड़क के साथ ड्रेनेज व्यवस्था और करीब 22 छोटी-बड़ी पुलियाओं का निर्माण भी किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार सड़क की चौड़ाई 12 मीटर होगी तथा सेंटर लाइन से 75 मीटर दूरी तक भवन निर्माण की अनुमति नहीं होगी। साथ ही बाईपास के 40 मीटर दायरे में भूमि उपयोग परिवर्तन पर भी प्रतिबंध रहेगा। संभावना जताई जा रही है कि भविष्य में इसी बाईपास को स्टेट हाईवे का मुख्य हिस्सा घोषित किया जा सकता है। ऐसा होने पर नगर के भीतर स्थित पुराने हाईवे मार्ग की कई व्यावसायिक संपत्तियों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
ठेकेदार द्वारा बाईपास के काम में ढिलाई बरती जा रही थी इसके लिए संबंधित फर्म को नोटिस दिया गया है और काम में तेजी लाने के निर्देश जारी किए हैं सबकुछ ठीक रहा तो उम्मीद है कि इसी वर्ष बाईपास का काम पूरा हो जाएगा।
- गोविंद मिश्रा, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी, खंड सुल्तानपुर
