नागरिक अभिव्यक्ति । @विवेक नंदवाना
किसी परिसर को किराए पर लेते समय किरायेदार और भूस्वामी के बीच आपसी विश्वास अपनी जगह है, लेकिन विवाद की स्थिति में सबसे अधिक महत्व दस्तावेजों का होता है। एक पक्ष अपनी मूल्यवान संपत्ति दूसरे के उपयोग के लिए देता है, वहीं दूसरा पक्ष उस परिसर में अपने परिवार, व्यवसाय और भविष्य की योजनाएं जोड़ता है। इसलिए किराया संबंधी व्यवस्था करते समय दोनों पक्षों के हितों की सुरक्षा जरूरी है। थोड़ी सावधानी शुरुआत में बरती जाए तो बाद में होने वाले विवाद से काफी हद तक बचा जा सकता है।
सावधानी जरुरी ताकी न हो कानूनी उलझन
किरायेदार की पूरी जानकारी रखें
किरायेदार का पहचानपत्र, स्थायी पता, मोबाइल नंबर, व्यवसाय और आवश्यकता के अनुसार पूर्व निवास की जानकारी लेना उपयोगी है। पुलिस सत्यापन का रिकॉर्ड सुरक्षित रखें।
सम्पत्ति पर ऋण या विवाद तो नहीं
किरायेदार को यह जानकारी कर लेना चाहिए कि जिस परिसर को वह किराए पर ले रहा है, उस पर कोई बैंक ऋण, बंधक या स्वामित्व विवाद तो नहीं है।
व्यावसायिक उपयोग की अनुमति जांचें
यदि परिसर व्यवसाय के लिए लिया जा रहा है तो यह देखना जरूरी है कि वहां प्रस्तावित व्यवसाय करना नियमों के अनुसार अनुमत है या नहीं। स्थानीय निकाय अथवा संबंधित विभाग से आवश्यक अनुमति या अनापत्ति की जरूरत हो तो पहले ही जानकारी कर लेना बेहतर है।
किराया और जमा राशि का हिसाब रखें
सिक्योरिटी या अग्रिम राशि दी जा रही है तो उसकी स्पष्ट रसीद लें। किराया किस माध्यम से और किस तारीख को दिया जाएगा, यह किरायानामा में स्पष्ट होना चाहिए।
पानी-बिजली और मरम्मत की जिम्मेदारी स्पष्ट हो
किरायानामा में यह साफ लिखा होना चाहिए कि पानी, बिजली, रखरखाव और सामान्य अथवा बड़ी मरम्मत की जिम्मेदारी किसकी होगी। किरायेदार के नाम बिजली या पानी का कनेक्शन लेने पर भूस्वामी को कोई आपत्ति नहीं है, यह शर्त भी आवश्यकतानुसार शामिल की जा सकती है।
11 माह का किरायानामा अपने आप कानूनी सुरक्षा नहीं
केवल 11 माह का किरायानामा बनवा लेना किसी पक्ष के लिए विवाद से पूरी कानूनी सुरक्षा की गारंटी नहीं है। किराये की अवधि, पंजीकरण और बेदखली संबंधी नियम परिस्थितियों तथा लागू कानून के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।
स्थानीय परिस्थिति के अनुसार किरायानामा बनवाएं
परिसर का उपयोग, किराया, जमा राशि, अवधि, मरम्मत, बिजली-पानी, उपकिराया, खाली कराने की शर्तें और विवाद की स्थिति जैसी बातों को ध्यान में रखते हुए स्थानीय स्तर पर योग्य एवं अनुभवी अधिवक्ता से किरायानामा तैयार करवाना अधिक सुरक्षित रहता है।
खास टिप्स
किरायानामा केवल किराया और अवधि लिखने का दस्तावेज नहीं है, बल्कि भविष्य में दोनों पक्षों के अधिकार और जिम्मेदारियां स्पष्ट करने का माध्यम है। इसलिए परिसर किराए पर लेने या देने से पहले स्वामित्व, किरायेदार की पहचान, संपत्ति पर ऋण-विवाद, उपयोग की अनुमति, भुगतान और अन्य शर्तों की जांच कर लेना चाहिए। शुरुआत में की गई थोड़ी सावधानी बाद के कानूनी विवाद और खर्च से बचा सकती है।
