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राजस्थान में बीज, खाद और कीटनाशकों की जांच होगी फेसलेस, डाक विभाग से हुआ समझौता

AgriQMS ऐप से होगी सैंपलिंग, सिस्टम तय करेगा किस लैब में होगी जांच; नमूने की पहचान और निर्माता की जानकारी रहेगी गोपनीय

संवाददाता
विशेष संवाददाता विशेष रिपोर्टर
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राजस्थान में बीज, खाद और कीटनाशकों की जांच होगी फेसलेस, डाक विभाग से हुआ समझौता
राजस्थान में बीज, खाद और कीटनाशकों की जांच होगी फेसलेस, डाक विभाग से हुआ समझौता
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बूंदी, 28 अक्टूबर। राजस्थान में बीज, उर्वरक और कीटनाशक रसायनों की गुणवत्ता जांच व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए कृषि विभाग ने नई पहल की है। अब कृषि आदानों के नमूने लेने से लेकर उन्हें प्रयोगशालाओं तक पहुंचाने और जांच रिपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया को डिजिटल एवं व्यवस्थित किया जाएगा। इसके लिए राजस्थान सरकार के कृषि विभाग और भारतीय डाक विभाग के राजस्थान परिमंडल के बीच जयपुर स्थित पंत कृषि भवन में समझौता ज्ञापन (MoU) किया गया है।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति के तहत शुरू की गई इस व्यवस्था का उद्देश्य नमूनों की जांच में मानवीय हस्तक्षेप कम करना, निष्पक्षता सुनिश्चित करना और किसानों को गुणवत्तापूर्ण कृषि आदान उपलब्ध कराने में मदद करना है।

AgriQMS ऐप से होगी डिजिटल सैंपलिंग

नई व्यवस्था में कृषि आदान निरीक्षक मौके पर ही AgriQMS मोबाइल ऐप के माध्यम से नमूना संग्रहण की प्रक्रिया पूरी करेंगे। नमूना लेते समय संबंधित स्थान की GPS आधारित जियो टैगिंग की जाएगी। उत्पाद की तस्वीरें, विवरण और आवश्यक दस्तावेज भी डिजिटल रूप से दर्ज किए जाएंगे।

प्रत्येक नमूने की पहचान के लिए सिस्टम QR कोड जनरेट करेगा। नमूने को सुरक्षित रखने के लिए टैम्पर-प्रूफ पैकिंग की जाएगी। इससे नमूने का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा और उसके साथ छेड़छाड़ या रिकॉर्ड में अनधिकृत बदलाव की आशंका कम होगी।

सिस्टम तय करेगा किस लैब में होगी जांच

इस व्यवस्था की प्रमुख विशेषता प्रयोगशालाओं का रैंडम आवंटन है। AgriQMS सिस्टम स्वयं तय करेगा कि किस नमूने को किस अधिकृत प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजना है। इससे निरीक्षक अपनी पसंद की प्रयोगशाला में नमूना भेजने का निर्णय नहीं ले सकेंगे।

इसके साथ ही जांच करने वाली प्रयोगशाला को संबंधित डीलर या निर्माता की पहचान नहीं बताई जाएगी। यानी नमूना लेने वाले निरीक्षक को पहले से यह जानकारी नहीं होगी कि नमूना किस लैब में भेजा जाएगा और लैब को यह पता नहीं होगा कि नमूना किस विक्रेता या निर्माता का है। इस दोहरी गोपनीयता से जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

भारतीय डाक विभाग पहुंचाएगा नमूने

समझौते के तहत कृषि विभाग द्वारा एकत्र किए गए नमूनों को जयपुर भेजा जाएगा, जहां उनकी पहचान गोपनीय रखने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके बाद भारतीय डाक विभाग स्पीड पोस्ट और बिजनेस पोस्ट सेंटर सेवाओं के माध्यम से नमूनों को प्रदेश की अधिकृत प्रयोगशालाओं तक पहुंचाएगा।

डाक विभाग नमूनों की ट्रैकिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराएगा। समझौता तीन वर्ष के लिए किया गया है, जिसे आपसी सहमति से आगे बढ़ाया जा सकेगा। इसके तहत कृषि विभाग को बुक नाउ पे लेटर (BNPL) सुविधा भी मिलेगी।

किसानों को क्या होगा फायदा?

बीज, उर्वरक और कीटनाशकों की गुणवत्ता फसल उत्पादन और किसानों की आय पर सीधा असर डालती है।

अमानक या घटिया कृषि आदानों के इस्तेमाल से किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

नई व्यवस्था से संभावित लाभ:

  • गुणवत्ता जांच में निष्पक्षता: नमूनों की पहचान गोपनीय रहने से जांच पर बाहरी प्रभाव की आशंका कम होगी।
  • अमानक उत्पादों पर कार्रवाई: घटिया बीज, खाद और कीटनाशकों की पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।
  • डिजिटल निगरानी: GPS टैगिंग, QR कोड और डिजिटल रिकॉर्ड से नमूनों की निगरानी आसान होगी।
  • सुरक्षित परिवहन: डाक विभाग की ट्रैकिंग सुविधा से नमूनों की आवाजाही का रिकॉर्ड रखा जा सकेगा।
  • पारदर्शिता और जवाबदेही: व्यवस्थित डिजिटल प्रक्रिया से जांच व्यवस्था में विश्वास बढ़ाने में मदद मिलेगी।

तीन साल के लिए हुआ समझौता

समझौता ज्ञापन के अवसर पर भारतीय डाक विभाग के सहायक पोस्ट मास्टर जनरल (पार्सल एवं लॉजिस्टिक्स) सुभाष चन्द मीणा ने AgriQMS ऐप के माध्यम से डाक विभाग की भूमिका की जानकारी दी। उन्होंने कृषि आदानों के नमूनों को सुरक्षित और समयबद्ध तरीके से अधिकृत प्रयोगशालाओं तक पहुंचाने के लिए आवश्यक सहयोग का आश्वासन दिया।

इस अवसर पर कृषि आयुक्तालय के अतिरिक्त निदेशक, संयुक्त निदेशक और गुण नियंत्रण शाखा के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। भारतीय डाक विभाग की ओर से राजेश पारीक, रोहित जैन और नफीस खान भी मौजूद रहे।

इस पहल से राजस्थान में कृषि आदानों की गुणवत्ता जांच प्रक्रिया को तकनीक आधारित और अधिक जवाबदेह बनाने का प्रयास किया गया है। इसका वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि नई व्यवस्था कितनी प्रभावी तरीके से लागू होती है और जांच के आधार पर अमानक उत्पादों के खिलाफ कितनी तेजी से कार्रवाई की जाती है।

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लेखक

विशेष संवाददाता

नागरिक अभिव्यक्ति विशेष डिजिटल रिपोर्टर एवं विश्लेषक।

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