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राजस्थान में अपराधों में कमी, महिला और गंभीर अपराधों के आंकड़ों में सुधार

2026 की तीन तिमाहियों के आंकड़े जारी, कुल दर्ज अपराधों में 1,753 की कमी; पॉक्सो, दुष्कर्म और छेड़छाड़ के मामलों में भी गिरावट

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विशेष संवाददाता विशेष रिपोर्टर
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राजस्थान में अपराधों में कमी, महिला और गंभीर अपराधों के आंकड़ों में सुधार
राजस्थान में अपराधों में कमी, महिला और गंभीर अपराधों के आंकड़ों में सुधार
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जयपुर। राजस्थान में वर्ष 2026 की पहली तीन तिमाहियों के दौरान पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में कुल दर्ज अपराधों में कमी दर्ज की गई है। पुलिस विभाग के तुलनात्मक आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2025 तक भारतीय दंड संहिता (भादंसं) और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत 1,47,534 प्रकरण दर्ज हुए थे, जबकि वर्ष 2026 में इसी अवधि तक 1,45,781 प्रकरण दर्ज किए गए। इस तरह कुल 1,753 प्रकरण कम दर्ज हुए हैं। हत्या, हत्या के प्रयास, संपत्ति संबंधी अपराधों और महिलाओं व बच्चों के विरुद्ध कुछ प्रमुख अपराधों में भी कमी सामने आई है।

राज्य सरकार के निर्देशानुसार कानून-व्यवस्था बनाए रखने और महिला सुरक्षा को लेकर पुलिस मुख्यालय से लेकर फील्ड स्तर तक प्रयास किए जा रहे हैं। पुलिस के अनुसार, अपराधों की रोकथाम, प्रभावी गश्त, त्वरित कार्रवाई और महिलाओं की सुरक्षा के लिए चलाए जा रहे अभियानों का असर तुलनात्मक आंकड़ों में दिखाई दे रहा है।

हत्या और हत्या के प्रयास के मामलों में कमी

पुलिस विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2026 में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में हत्या के 23 और हत्या के प्रयास के 174 प्रकरण कम दर्ज हुए हैं। संपत्ति संबंधी अपराधों में भी गिरावट दर्ज की गई। डकैती के मामलों में 19.67 प्रतिशत, लूट में 16.40 प्रतिशत और नकबजनी में 4.63 प्रतिशत की कमी आई है। पुलिस का कहना है कि अपराध नियंत्रण के लिए निगरानी, नियमित गश्त और लक्षित कार्रवाई की जा रही है।

एनडीपीएस और आर्म्स एक्ट में बढ़ी कार्रवाई

स्थानीय एवं विशेष अधिनियमों के तहत वर्ष 2025 में 65,753 प्रकरण दर्ज हुए थे, जबकि वर्ष 2026 में सितंबर तक यह संख्या बढ़कर 70,035 हो गई। इस प्रकार 4,282 प्रकरणों की वृद्धि दर्ज की गई।

इनमें एनडीपीएस एक्ट के तहत 1,815 प्रकरण यानी 35.13 प्रतिशत, आर्म्स एक्ट के तहत 538 प्रकरण यानी 10.17 प्रतिशत और आबकारी अधिनियम के तहत 908 प्रकरण यानी 4.92 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। पुलिस विभाग के अनुसार, इन आंकड़ों में बढ़ोतरी कानूनों के तहत की गई कार्रवाई और उनके प्रभावी क्रियान्वयन को दर्शाती है।

एससी-एसटी एक्ट के मामलों में 15.47 प्रतिशत गिरावट

अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज मामलों में भी पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में कमी आई है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, इस श्रेणी में 954 प्रकरण कम दर्ज हुए, जो 15.47 प्रतिशत की गिरावट है।

पॉक्सो, दुष्कर्म और छेड़छाड़ के मामलों में कमी

महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराधों के आंकड़ों में भी गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2026 में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में पॉक्सो एक्ट के 478 प्रकरण यानी 19.20 प्रतिशत, दुष्कर्म के 356 प्रकरण यानी 7.96 प्रतिशत और छेड़छाड़ के 603 प्रकरण यानी 7.38 प्रतिशत कम दर्ज हुए हैं।

पुलिस के अनुसार, महिलाओं की सुरक्षा के लिए संचालित कालिका यूनिट, एंटी रोमियो स्क्वॉड और अन्य योजनाओं के क्रियान्वयन से छेड़छाड़ जैसे अपराधों की रोकथाम में मदद मिली है। महिला अपराधों की रोकथाम, पीड़ितों को त्वरित सहायता और मामलों के प्रभावी अनुसंधान को पुलिस की प्राथमिकताओं में शामिल किया गया है।

घरेलू प्रताड़ना के मामलों में बढ़ी रिपोर्टिंग

दूसरी ओर, घरेलू प्रताड़ना, दहेज की मांग और पारिवारिक विवादों से जुड़े मामलों में दर्ज प्रकरणों की संख्या बढ़ी है। वर्ष 2025 में ऐसे 9,979 मामले दर्ज हुए थे, जबकि वर्ष 2026 में सितंबर तक यह संख्या बढ़कर 10,562 हो गई

पुलिस विभाग इस वृद्धि को महिलाओं में जागरूकता और शिकायत दर्ज कराने के प्रति बढ़ते भरोसे से जोड़ रहा है। महिलाओं को सहायता और काउंसलिंग उपलब्ध कराने के लिए प्रत्येक वृत्त स्तर पर एक पुलिस थाने में महिला सुरक्षा एवं सलाह केंद्र संचालित किया जा रहा है।

महिला सुरक्षा पर विशेष जोर

राज्य सरकार और पुलिस मुख्यालय ने महिला अपराधों की रोकथाम के प्रति प्रतिबद्धता जताई है। पुलिस के अनुसार, अपराधों पर नियंत्रण के साथ पीड़ितों को समय पर सहायता, निष्पक्ष अनुसंधान और कानून के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है।

विभागीय आंकड़ों में कुल दर्ज अपराधों और कई गंभीर अपराध श्रेणियों में कमी सामने आई है, जबकि विशेष अधिनियमों के तहत दर्ज मामलों में वृद्धि हुई है। घरेलू प्रताड़ना से जुड़े मामलों में बढ़ी रिपोर्टिंग को भी पुलिस ने महिलाओं के शिकायत लेकर आगे आने का सकारात्मक संकेत बताया है।

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लेखक

विशेष संवाददाता

नागरिक अभिव्यक्ति विशेष डिजिटल रिपोर्टर एवं विश्लेषक।

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