नागरीक अभिव्यक्ति @ कोटा
डीएपी और यूरिया लेने में किसानों को आ रही परेशानी के बीच राजस्थान में खाद वितरण की नई व्यवस्था को आगामी आदेश तक स्थगित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। कृषि आयुक्तालय ने केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय को पत्र भेजकर व्यवस्था स्थगित करने का अनुरोध किया है।
पत्र में किसानों और खाद विक्रेताओं से मिली शिकायतों और तकनीकी दिक्कतों का उल्लेख किया गया है। भाजपा देहात जिलाध्यक्ष प्रेम गोचर के अनुसार किसानों की परेशानी को लेकर उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर से बात की थी। पिछले सप्ताह कोटा और बूंदी के किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने भी बिरला से मुलाकात कर हस्तक्षेप का आग्रह किया था। इसके बाद बिरला ने कृषि विभाग के उच्चाधिकारियों से बात की, जिसके बाद विभाग ने केंद्र को पत्र भेजा।
कृषि विभाग के अनुसार प्रदेश के 18 जिलों में किसान पंजीयन के आधार पर यह व्यवस्था लागू की गई थी। इसमें किसानों को खसरा नंबर, जमीन का विवरण और खाद की बुकिंग से जुड़ी कई परेशानियां आईं। कई खेत व्यवस्था में दर्ज नहीं दिखे, जबकि कुछ मामलों में दूसरे किसानों के खसरा नंबर से खाद लेने की स्थिति सामने आई। भूमि विहीन लोगों द्वारा गलत खसरा नंबर डालकर खाद लेने की आशंका भी जताई गई। विभाग के अनुसार नई व्यवस्था लागू होने के बाद 52 हजार मीट्रिक टन से अधिक यूरिया और डीएपी की खरीद हो चुकी है। विभाग ने आशंका जताई कि यही गति जारी रही तो रबी सीजन में खाद की कमी हो सकती है। खाद विक्रेताओं के स्तर पर भी पर्ची कटने और भंडार से जुड़ी शिकायतें सामने आईं। गोचर ने कहा कि व्यवस्था स्थगित होने के बाद किसानों को आधार आधारित पुरानी व्यवस्था से खाद मिलने में राहत मिलेगी।
