जयपुर/बूंदी, 27 अक्टूबर। राजस्थान में प्राकृतिक एवं योगिक खेती को प्रोत्साहित करने और टिकाऊ कृषि पद्धतियों के विस्तार के लिए कृषि विभाग तथा ब्रह्माकुमारी संस्थान के कृषि एवं ग्रामीण विकास प्रभाग के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) किया गया। आबूरोड स्थित शांतिवन परिसर में आयोजित ग्लोबल समिट के दौरान हुए इस समझौते का उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक करना, उन्हें प्रशिक्षण देना और कृषि विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाना है।
राजस्थान सरकार की ओर से कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। वहीं, ब्रह्माकुमारी संस्थान की ओर से कृषि एवं ग्रामीण विकास प्रभाग की अध्यक्ष बीके सरला के प्रतिनिधित्व में समझौता संपन्न हुआ। इसके तहत प्रदेश में पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए दोनों पक्ष मिलकर प्रशिक्षण, कार्यशालाएं और जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करेंगे।
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की पहल
कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने कहा कि राज्य सरकार खेती को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए प्रयासरत है। प्राकृतिक खेती से मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, जल संरक्षण और स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग में मदद मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती का विस्तार करने के लिए किसानों को तकनीकी जानकारी, नियमित मार्गदर्शन और सफल कृषि मॉडलों को समझने का अवसर देना जरूरी है। कृषि विभाग और ब्रह्माकुमारी संस्थान का संयुक्त प्रयास इस दिशा में उपयोगी हो सकता है।
प्रदेशभर में किसानों को मिलेगा प्रशिक्षण
एमओयू के तहत प्रदेश के विभिन्न जिलों में प्राकृतिक एवं टिकाऊ खेती से संबंधित प्रशिक्षण शिविर, कार्यशालाएं, प्रदर्शनियां और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा सकेंगे। इनमें किसानों को मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, स्थानीय संसाधनों से कृषि आदान तैयार करने, जल संरक्षण, जलवायु अनुकूल कृषि तकनीकों और टिकाऊ कृषि प्रबंधन की जानकारी दी जाएगी।
किसानों को सफल प्राकृतिक खेती मॉडल दिखाने के लिए शैक्षणिक भ्रमण और अनुभव साझा करने के कार्यक्रम भी आयोजित किए जा सकेंगे। इससे किसान इन पद्धतियों को समझकर अपनी कृषि परिस्थितियों के अनुसार अपनाने के विकल्पों पर विचार कर सकेंगे।
कृषि अधिकारियों और कर्मचारियों की भी होगी ट्रेनिंग
समझौते के तहत कृषि विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों, कृषि पर्यवेक्षकों और क्षेत्रीय कार्मिकों को प्राकृतिक खेती की तकनीकों तथा कृषि प्रसार गतिविधियों के संबंध में प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इसके लिए प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जा सकेंगे। इनके माध्यम से तैयार मुख्य प्रशिक्षक जिला, ब्लॉक और ग्राम स्तर पर किसानों तथा कृषि कार्मिकों को मार्गदर्शन प्रदान करेंगे। इससे प्राकृतिक खेती से जुड़ी तकनीकी जानकारी को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
ग्राम स्तर तक चलेंगे जागरूकता अभियान
एमओयू के अंतर्गत राज्य, संभाग, जिला, ब्लॉक और ग्राम स्तर पर संयुक्त जागरूकता अभियान चलाए जा सकेंगे। इसके तहत किसान मेले, सम्मेलन, कार्यशालाएं, प्रशिक्षण शिविर और प्रदर्शनियां आयोजित की जाएंगी।
प्रारंभिक चरण में चयनित जिलों या कृषि समूहों में गतिविधियां संचालित करने और उनके अनुभवों एवं परिणामों के आधार पर दूसरे क्षेत्रों में इनका चरणबद्ध विस्तार करने का प्रस्ताव है।
आबूरोड के तपोवन को उत्कृष्टता केंद्र बनाने का प्रस्ताव
प्राकृतिक एवं योगिक खेती को संस्थागत स्तर पर बढ़ावा देने के लिए आबूरोड स्थित तपोवन को योगिक प्राकृतिक खेती के उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव भी रखा गया है। इसका उद्देश्य प्रशिक्षण, जागरूकता और प्राकृतिक खेती से संबंधित गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए एक केंद्र विकसित करना है
कृषि आयुक्त गोयल के अनुसार, किसानों को वैज्ञानिक जानकारी, प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग और टिकाऊ कृषि पद्धतियों से जोड़ना जरूरी है। इस सहयोग से मिट्टी के स्वास्थ्य, जल संरक्षण और पर्यावरण अनुकूल कृषि व्यवस्था के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
