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वोट डालकर नहीं लौटेंगे कर्मचारी, पांच दिन गांव में ही कटेगी चुनावी ड्यूटी

वन स्टेट-वन इलेक्शन 2.27 लाख से ज्यादा कर्मचारी तैनात

संवाददाता
विशेष संवाददाता विशेष रिपोर्टर
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वोट डालकर नहीं लौटेंगे कर्मचारी, पांच दिन गांव में ही कटेगी चुनावी ड्यूटी
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नागरिक अभिव्यक्ति कोटा।राजस्थान के गांवों में इस बार पंचायत चुनाव मतदाताओं के साथ चुनाव कराने वाले कर्मचारियों के लिए भी लंबी परीक्षा बनने जा रहा है। वन स्टेट-वन इलेक्शन व्यवस्था के तहत एक ही पोलिंग पार्टी को लगातार कई दिनों तक गांव में रहकर अलग-अलग चुनावी प्रक्रियाएं पूरी करानी होंगी। जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्य का चुनाव कराने के बाद यही टीम सरपंच-वार्ड पंच और फिर उपसरपंच का चुनाव भी कराएगी।

पुलिस और सुरक्षा बलों को छोड़कर 2.27 लाख से अधिक कर्मचारी चुनाव ड्यूटी में लगाए जाएंगे। 21 अक्टूबर को प्रशिक्षण पूरा होने के बाद पोलिंग पार्टियां मतदान केंद्रों के लिए रवाना होंगी। 22 अक्टूबर को जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए ईवीएम से मतदान होगा। इसके बाद कर्मचारी उसी गांव में रुकेंगे। 23 अक्टूबर को सरपंच और वार्ड पंच के नामांकन होंगे, जबकि 24 अक्टूबर को बैलेट पेपर से मतदान और शाम से मतगणना होगी। परिणाम घोषित होने के बाद भी ड्यूटी खत्म नहीं होगी। 25 अक्टूबर को उपसरपंच का चुनाव कराया जाएगा और इसके बाद ही पोलिंग पार्टी लौट सकेगी। इस तरह एक टीम करीब पांच दिन और चार रात लगातार चुनावी ड्यूटी में रहेगी। दूरदराज के मतदान केंद्रों पर कर्मचारियों के ठहरने, भोजन, आवागमन और चुनाव सामग्री की व्यवस्था प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होगी।

भोजन, पानी, बिजली, रात्रि ठहराव की चुनौती

इस बार वन स्टेट-वन इलेक्शन की व्यवस्था ने चुनावी ड्यूटी को एक लंबी जिम्मेदारी में बदल दिया है। कर्मचारियों को कई दिनों तक मतदान केंद्र पर रहना होगा और इसके लिए जरूरी निजी सामान भी साथ ले जाना पड़ेगा। पांच दिन तक पूरे चुनावी अमले को गांवों में व्यवस्थित रखने की होगी। दूरदराज के मतदान केंद्रों पर भोजन, पानी, बिजली, शौचालय, रात्रि ठहराव और सुरक्षा जैसी व्यवस्थाएं समय पर उपलब्ध कराना प्रशासन की परीक्षा होगी।

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लेखक

विशेष संवाददाता

नागरिक अभिव्यक्ति विशेष डिजिटल रिपोर्टर एवं विश्लेषक।

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