नागरिक अभिव्यक्ति । बूंदी
बूंदी। बाघों और गिद्धों के संरक्षण के साथ अब हाड़ौती के जंगलों में भेड़ियों के संरक्षण की तैयारी भी तेज हो गई है। राजस्थान में भेड़ियों के संरक्षण के लिए राज्यस्तरीय योजना बनाने की दिशा में वन विभाग ने सर्वे शुरू किया है। इसकी शुरुआत हाड़ौती के रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व, मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व और आसपास के जंगलों से हुई है। विभाग भेड़ियों के वास्तविक आवास, संख्या, फैलाव, व्यवहार और उनके लिए उपलब्ध शिकार की स्थिति का पता लगाने में जुटा है। इसके लिए वन विभाग ने आमजन, शोधकर्ताओं, वन्यजीव प्रेमियों, फोटोग्राफरों, विद्यार्थियों और ग्रामीणों से भी जानकारी साझा करने की अपील की है।
वन विभाग की वन्यजीव शाखा ने इस काम के लिए गूगल फॉर्म जारी किया है, जिसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति भेड़ियों की मौजूदगी और उनके देखे जाने से जुड़ी जानकारी दे सकता है। विभाग का उद्देश्य अलग-अलग क्षेत्रों से मिलने वाली सूचनाओं और अपने रिकॉर्ड को मिलाकर भेड़ियों के आवास और फैलाव का मानचित्र तैयार करना है। दोनों टाइगर रिजर्व के कोर और बफर क्षेत्रों में फोटोट्रैप कैमरों के जरिए भी उनकी निगरानी की जा रही है।
राजस्थान में भेड़ियों की घटती संख्या संरक्षण की जरूरत को रेखांकित करती है। वन विभाग की 21 जुलाई 2024 की आधिकारिक वन्यजीव गणना में प्रदेश में 771 भेड़िए दर्ज किए गए थे। इनमें 299 संरक्षित वन क्षेत्रों में और 472 अन्य क्षेत्रों में पाए गए थे। हालांकि, विभागीय गणना को वैज्ञानिक दृष्टि से पूरी तरह सटीक नहीं माना गया है, लेकिन ये आंकड़े इस प्रजाति के संरक्षण की आवश्यकता जरूर बताते हैं। हाड़ौती के जंगलों में भेड़ियों की अच्छी मौजूदगी और अलग-अलग क्षेत्रों में उनके झुंड दिखाई देने की सूचनाओं ने इस इलाके को संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण बना दिया है।
भीमलत और बरड़ के जंगलों में संरक्षण की तैयारी
रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के भीमलत और बांका भोपतपुरा के बफर क्षेत्र में पिछले दो साल से भेड़ियों के संरक्षण की दिशा में काम चल रहा है। टाइगर रिजर्व की नवगठित भोपतपुरा रेंज में उपरमाल के पठार पर करीब 800 हेक्टेयर वन क्षेत्र को भेड़ियों और गिद्धों के संरक्षण के लिए चिह्नित किया गया है। योजना के तहत भीलवाड़ा जिले के बांका, भोपतपुरा, जलिंद्री, सुंठी, भड़क्या माताजी का नाला और सीताकुंड के साथ बूंदी जिले के भीमलत और मुंडेड़ वनखंड को महत्वपूर्ण आवास के रूप में देखा जा रहा है।
भीमलत की प्राकृतिक वादियां, बाणगंगा नदी के पास भाला का जंगल, भोपतपुरा के नजदीक भड़क्या माताजी का जंगल तथा गरड़दा और अभयपुरा बांध के बीच मुंडेड़ का पठार भेड़ियों और गिद्धों के संरक्षण के लिए चिह्नित किए गए हैं। वन विभाग इन क्षेत्रों को बाघों के साथ अन्य वन्यजीवों के अनुकूल बनाने की दिशा में भी काम कर रहा है।
मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में भी भेड़ियों की मौजूदगी दर्ज की गई है। बूंदी जिले के जवाहर सागर अभयारण्य में इनके दिखाई देने की सूचनाएं मिली हैं। विभागीय प्रयासों के बीच यहां भेड़ियों के झुंड नजर आने की बात भी सामने आई है। वन विभाग की नई पहल अब केवल दो टाइगर रिजर्व तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे हाड़ौती संभाग में भेड़ियों के संभावित आवासों की पहचान और संरक्षण पर ध्यान दिया जा रहा है। इससे घास के मैदानों और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों के संरक्षण के साथ क्षेत्र में इको टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के वन संरक्षक एवं फील्ड डायरेक्टर टी. मोहन राज ने बताया कि हाड़ौती के जंगलों में भेड़ियों के आवास, वास्तविक संख्या, उनके शिकार की उपलब्धता और व्यवहार का अध्ययन करने के लिए आमजन तथा वन्यजीव प्रेमियों के सहयोग से व्यापक सर्वे शुरू किया गया है। सर्वे से प्राप्त जानकारी और वन विभाग के आंकड़ों के आधार पर भेड़ियों के वैज्ञानिक संरक्षण और संवर्धन के लिए योजना तैयार की जाएगी।
