नागरिक अभिव्यक्ति @ बूंदी
रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के जंगलों में इन दिनों जैव विविधता की एक खूबसूरत तस्वीर देखने को मिली। रिजर्व के कालदां बफर जोन स्थित एक नाले में बड़ी संख्या में हरियल पक्षी नजर आए। पीले पैरों और हरे-पीले रंग वाले इन खूबसूरत परिंदों का झुंड वन्यजीव प्रेमी पृथ्वी सिंह राजावत के कैमरे में कैद हुआ। पेड़ों की हरियाली के बीच घुले-मिले हरियल की मौजूदगी ने जंगल के प्राकृतिक सौंदर्य को और खास बना दिया। यह नजारा इस बात की भी झलक देता है कि बूंदी के जंगल केवल बड़े वन्यजीवों ही नहीं, बल्कि रंग-बिरंगे पक्षियों की भी समृद्ध दुनिया हैं।
महाराष्ट्र का राज्य पक्षी है हरियल
सह आचार्य (भूगोल) भारतेन्दु ने बताया कि सामान्य बोलचाल में इस पक्षी को हरियल कहा जाता है। इसके शरीर का ऊपरी हिस्सा गहरे हरे रंग का और निचला हिस्सा पीले रंग का होता है। यह कबूतर की एक प्रजाति है और मुख्य रूप से फल खाता है। बरगद, पीपल और गूलर जैसे फलदार पेड़ों के फल इसका प्रमुख भोजन हैं। हरियल सामान्यतः ऊंचे पेड़ों की शाखाओं पर बैठता है और समूहों में दिखाई देता है। राजस्थान सहित भारतीय उपमहाद्वीप में पाया जाने वाला यह पक्षी महाराष्ट्र का राज्य पक्षी भी है।
बीजों के प्रसार में निभाता है अहम भूमिका
सह आचार्य (बॉटनी) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद मीणा ने बताया कि हरियल का वैज्ञानिक नाम ट्रेरोन फीनिकोप्टेरस (Treron phoenicopterus) है। यह जंगलों, बगीचों और पेड़ों से घिरे इलाकों में पाया जाता है। जमीन पर कम उतरने वाला हरियल ऊंची शाखाओं पर रहना पसंद करता है। इसकी उड़ान तेज और आवाज मधुर होती है। फल खाने के साथ ही यह उनके बीजों को फैलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इससे जंगलों और अन्य क्षेत्रों में पेड़-पौधों के प्राकृतिक विकास को मदद मिलती है।
फलदार पेड़ों का संरक्षण जरूरी
वन्यजीव प्रेमी पृथ्वी सिंह राजावत के अनुसार, हरियल की मौजूदगी बताती है कि जंगल केवल बाघ और बड़े वन्यजीवों का ही आश्रय नहीं हैं, बल्कि असंख्य छोटे-बड़े जीवों और पक्षियों का साझा संसार हैं। इन पक्षियों के संरक्षण के लिए प्राकृतिक वनस्पति और फलदार पेड़ों को बचाना जरूरी है। इससे उन्हें पर्याप्त भोजन और सुरक्षित आवास मिल सकेगा। ramगढ़ विषधारी जैसे वन क्षेत्रों में इस तरह के पक्षियों की मौजूदगी जैव विविधता के संरक्षण के महत्व को भी रेखांकित करती है।
