बूंदी। रामगढ़-विषधारी टाइगर रिजर्व के बफर जोन में बूंदी शहर से भीमलत तक फैला कालदां का दुर्गम पहाड़ी जंगल वन्यजीवों के लिए अनुकूल प्राकृतिक आवास बन रहा है। करीब 380 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले इस जंगल में प्राकृतिक जलस्रोतों और झरनों के कारण गर्मी के मौसम में भी पानी की उपलब्धता बनी रहती है।
सुरक्षित वातावरण और मानवीय गतिविधियों का अभाव वन्यजीवों के लिए इसे महत्वपूर्ण ठिकाना बनाता है।
इसी क्षेत्र में युवा बाघिन RVT-8 ने अपनी टेरिटरी स्थापित कर ली है और वह जंगल में स्वतंत्र रूप से विचरण कर रही है।
आबादी और कृषि गतिविधियों से दूर जैवविविधता का खजाना
वन्यजीव प्रेमी पृथ्वी सिंह राजावत के अनुसार, कालदां के जंगल की प्रमुख विशेषता यहां मानवीय दखल का कम होना है। उनके मुताबिक, करीब 380 वर्ग किलोमीटर में फैले इस क्षेत्र में न तो गांव बसे हैं और न ही कृषि या व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होती हैं। दुर्गम पहाड़ियों और प्राकृतिक संरचना के कारण जंगल का बड़ा हिस्सा वन्यजीवों के लिए सुरक्षित बना हुआ है।
पहाड़ियों की चोटियों पर मौजूद प्राकृतिक जलस्रोत और झरने सालभर पानी उपलब्ध कराते हैं। इससे भीषण गर्मी में भी वन्यजीवों को पानी के लिए दूर तक भटकने की जरूरत नहीं पड़ती। राजावत के अनुसार, पर्याप्त जल और अनुकूल प्राकृतिक परिस्थितियों के चलते इस क्षेत्र में भालू, पैंथर सहित अन्य वन्यजीवों की मौजूदगी बढ़ी है।
युवा बाघिन RVT-8 ने बनाई अपनी टेरिटरी
कालदां के जंगल में बाघों की मौजूदगी इस क्षेत्र के प्राकृतिक महत्व को और बढ़ाती है। पानी और शिकार की उपलब्धता के चलते यह इलाका बाघों के अनुकूल माना जा रहा है। टाइगर रिजर्व के कोर-1 से सटे कालदां के जंगल में युवा बाघिन RVT-8 ने अपनी टेरिटरी बना ली है। वह इस क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से विचरण कर रही है।
बाघिन की मौजूदगी से कालदां के जंगल की वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से अहमियत सामने आती है। ऐसे प्राकृतिक आवासों में जलस्रोतों की सुरक्षा, वन्यजीवों की निगरानी और मानवीय हस्तक्षेप को नियंत्रित रखना महत्वपूर्ण है।
टाइगर रिजर्व का हिस्सा, लेकिन प्रबंधन को लेकर सवाल
वन्यजीवों के अनुकूल परिस्थितियों के बावजूद कालदां के जंगल में संरक्षण और आधारभूत सुविधाओं के विकास को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के अनुसार, यह क्षेत्र वर्तमान में प्रादेशिक वन मंडल यानी टेरिटोरियल डीएफओ के प्रशासनिक नियंत्रण में है। टाइगर रिजर्व क्षेत्र से जुड़ा होने के बावजूद यहां प्रोजेक्ट टाइगर प्रबंधन के तहत संरक्षण संबंधी कार्यों को अपेक्षित गति नहीं मिल पाने की बात सामने आई है।
स्थानीय वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि कालदां जैसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक आवास में बाघों की सुरक्षा, निगरानी और अन्य संरक्षण गतिविधियों को मजबूत करने की जरूरत है। इसके लिए उन्होंने क्षेत्र को टाइगर रिजर्व प्रबंधन के अधीन सौंपने की मांग उठाई है।
बेहतर प्रबंधन से मजबूत हो सकता है संरक्षण
कालदां का जंगल प्राकृतिक जलस्रोतों, दुर्गम पहाड़ियों और वन्यजीवों की मौजूदगी के कारण रामगढ़-विषधारी टाइगर रिजर्व के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र है। युवा बाघिन RVT-8 की मौजूदगी भी इसके महत्व को रेखांकित करती है। ऐसे में वन विभाग के विभिन्न प्रबंधन तंत्रों के बीच बेहतर तालमेल और संरक्षण कार्यों को गति देना जरूरी माना जा रहा है।
स्थानीय वन्यजीव प्रेमियों को उम्मीद है कि क्षेत्र के प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उचित निर्णय होने पर कालदां के जंगल में वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों को और मजबूती मिल सकेगी।
