बूंदी। हाड़ौती के रामगढ़-विषधारी और मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में बाघों के लिए शिकार प्रजातियों की उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में वन विभाग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। दिल्ली के डियर पार्क से दोनों टाइगर रिजर्व में करीब 400 चीतल लाने की योजना बनाई गई है। इसके तहत रामगढ़-विषधारी और मुकुंदरा में 200-200 चीतल चरणबद्ध तरीके से लाए जाएंगे। चीतल शिफ्टिंग के लिए गठित समन्वय समिति की शुक्रवार को हुई वर्चुअल बैठक में तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया।
बैठक में मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर टी. मोहनराज, रामगढ़-विषधारी टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर सुगनाराम जाट, दोनों टाइगर रिजर्व के डीएफओ, चिड़ियाघर प्राधिकरण और भारतीय वन्यजीव संस्थान के विशेषज्ञों ने भाग लिया। बैठक में चीतलों को सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित करने और नए वातावरण के अनुकूल बनाने की प्रक्रिया पर चर्चा की गई।
सुप्रीम कोर्ट की स्वीकृति के बाद आगे बढ़ी प्रक्रिया
हाड़ौती के दोनों टाइगर रिजर्व में चीतलों की शिफ्टिंग की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका के कारण अटक गई थी। इसके बाद एक उच्चस्तरीय तीन सदस्यीय जांच समिति ने रामगढ़-विषधारी टाइगर रिजर्व का दौरा कर वहां शिकार प्रजातियों की उपलब्धता और मौजूदा परिस्थितियों का जायजा लिया।
समिति में सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी के सदस्य सुनील लिमाये, डॉ. जे.आर. भट्ट और भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. सनथ मुलैया शामिल थे। टीम ने टाइगर रिजर्व के अधिकारियों के साथ कोर क्षेत्र का भ्रमण कर प्रे-बेस यानी बाघों के प्राकृतिक शिकार के लिए उपलब्ध वन्यजीवों की स्थिति का अध्ययन किया। समिति की रिपोर्ट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने चीतल शिफ्टिंग को स्वीकृति दी, जिसके बाद योजना को आगे बढ़ाया जा रहा है।
पहले सॉफ्ट एनक्लोजर में रखे जाएंगे चीतल
रामगढ़-विषधारी टाइगर रिजर्व के वन संरक्षक एवं फील्ड डायरेक्टर सुगनाराम जाट के अनुसार, दिल्ली के डियर पार्क से करीब 400 चीतल लाने की योजना है। इसके लिए जल्द ही टीमें गठित की जाएंगी। चीतलों को सीधे जंगल में छोड़ने के बजाय पहले सॉफ्ट एनक्लोजर में रखा जाएगा, ताकि वे नए वातावरण और जंगल की परिस्थितियों के अनुकूल हो सकें। इसके बाद उन्हें चरणबद्ध तरीके से जंगल में छोड़ा जाएगा।
बाघों के प्राकृतिक आवास को मिलेगा सहारा
चीतल शाकाहारी वन्यजीव हैं और बाघों के प्राकृतिक शिकार का महत्वपूर्ण हिस्सा माने जाते हैं। दोनों टाइगर रिजर्व में चीतलों की संख्या बढ़ने से प्रे-बेस मजबूत करने में मदद मिल सकती है। इससे बाघों के लिए प्राकृतिक आवास में भोजन की उपलब्धता बेहतर करने के प्रयासों को गति मिलने की उम्मीद है। हालांकि, शिफ्टिंग की सफलता चीतलों के सुरक्षित स्थानांतरण, नए वातावरण में उनके अनुकूलन और वन विभाग की निगरानी पर निर्भर करेगी।
