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टाइगर सफारी में पिछड़ा बूंदी का रामगढ़-विषधारी, 6 माह में पहुंचे मात्र 15 विदेशी पर्यटक

तीन स्वीकृत सफारी जोन में से टाइगर हिल में ही नियमित सफारी, भीमलत में तीन साल बाद भी शुरू नहीं हुई जंगल सफारी

संवाददाता
विशेष संवाददाता विशेष रिपोर्टर
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टाइगर सफारी में पिछड़ा बूंदी का रामगढ़-विषधारी, 6 माह में पहुंचे मात्र 15 विदेशी पर्यटक
टाइगर सफारी में पिछड़ा बूंदी का रामगढ़-विषधारी, 6 माह में पहुंचे मात्र 15 विदेशी पर्यटक
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बूंदी। रामगढ़-विषधारी टाइगर रिजर्व में करीब तीन साल पहले शुरू हुई जंगल सफारी पर्यटकों को अब तक आकर्षित नहीं कर पाई है। बफर क्षेत्र में तीन सफारी जोन स्वीकृत होने के बावजूद नियमित पर्यटक सफारी मुख्य रूप से एक ही रूट पर संचालित हो रही है। वहीं, भीमलत के जोन नंबर-3 में ऑनलाइन बुकिंग शुरू होने के करीब तीन साल बाद भी जंगल सफारी शुरू नहीं हो सकी है।

राजस्थान वन विभाग की वेबसाइट पर रामगढ़-विषधारी टाइगर रिजर्व के लिए ऑनलाइन सफारी बुकिंग की व्यवस्था है। बफर क्षेत्र में तीन सफारी जोन बनाए गए हैं। इनमें जोन नंबर-1 में बूंदी शहर से सटा टाइगर हिल, जोन नंबर-2 में सूरज छतरी और जोन नंबर-3 में भीमलत शामिल हैं। वर्तमान में नियमित रूप से पर्यटक सफारी मुख्य रूप से जोन नंबर-1 के टाइगर हिल, झरबंधा और गुमान बावड़ी क्षेत्र के जंगलों में ही हो रही है।

इस रूट पर भी पर्यटकों की संख्या काफी कम है। इस साल अप्रैल से अब तक रामगढ़-विषधारी में करीब 15 विदेशी पर्यटकों ने जंगल सफारी की है। देशी पर्यटकों की संख्या भी अपेक्षाकृत कम बनी हुई है।

23 जून 2023 से शुरू हुई थी सफारी

रामगढ़-विषधारी में बफर क्षेत्र से जंगल सफारी की शुरुआत 23 जून 2023 को हुई थी। हालांकि, कोर क्षेत्र के रामगढ़ महल और मेज नदी क्षेत्र में सफारी शुरू करने का मामला अभी स्वीकृति और बाघ संरक्षण योजना में आवश्यक संशोधन से जुड़ा हुआ है।

मार्च 2026 की रिपोर्ट के अनुसार कोर क्षेत्र में सफारी शुरू करने के लिए बाघ संरक्षण योजना में आवश्यक संशोधन तथा राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की स्वीकृति की प्रक्रिया चल रही है।

टाइगर साइटिंग की उम्मीद लेकर आने वाले पर्यटक निराश

रामगढ़-विषधारी आने वाले देशी-विदेशी पर्यटक टाइगर साइटिंग की उम्मीद भी रखते हैं, लेकिन रिजर्व के अधिकांश बाघ कोर क्षेत्र के जंगलों और रामगढ़ महल के आसपास की टेरिटरी में मौजूद होने के कारण बफर क्षेत्र की मौजूदा सफारी में टाइगर साइटिंग की संभावना सीमित रहती है।

इसके अलावा बफर जोन के भीमलत क्षेत्र में सफारी शुरू नहीं होने से पर्यटकों के लिए उपलब्ध पर्यटन विकल्प भी सीमित हैं। जैव विविधता से समृद्ध तलवास क्षेत्र के किला अजीतगढ़ में करीब दो वर्ष पहले ट्रेक भी तैयार कराया गया था, लेकिन इसे अभी तक नया सफारी रूट नहीं बनाया जा सका है।

भीमलत और कालदां में इको टूरिज्म की संभावनाएं

रामगढ़-विषधारी के भीमलत और बांका-भोपतपुरा के जैव विविधता से समृद्ध बफर क्षेत्रों में वन विभाग की ओर से गिद्ध और भेड़िया संरक्षण से जुड़े कार्य किए जा रहे हैं। कालदां क्षेत्र में भी ट्रेक सहित अन्य कार्य प्रस्तावित एवं संचालित किए जा रहे हैं।

टाइगर रिजर्व की नवगठित भोपतपुरा रेंज में उपरमाल के पठार पर करीब 800 हेक्टेयर वन क्षेत्र को भेड़िया और गिद्ध संरक्षण क्षेत्र के रूप में चिह्नित कर काम शुरू किया गया है। इसके तहत भीलवाड़ा जिले के बांका, भोपतपुरा, जलिन्द्री, सुंठी और भड़क्या माताजी का नाला, सीताकुंड तथा बूंदी जिले के कालदां, भीमलत और मुंदेड़ वनखंड को संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र माना गया है।

इन क्षेत्रों में भीमलत की प्राकृतिक वादियां, बाणगंगा नदी के पास भाला का जंगल, भोपतपुरा के समीप भड़क्या माताजी का जंगल तथा गरड़दा और अभयपुरा बांधों के बीच मुंदेड़ का पठार विकसित किए जाने की योजना

इससे क्षेत्र में वन्यजीव आधारित इको टूरिज्म को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है

कालदां क्षेत्र में बाघिन आरवीटी-8 की मौजूदगी को देखते हुए यहां भविष्य में पर्यटकों को बाघ के साथ भेड़िया और गिद्ध जैसे वन्यजीव देखने का अवसर मिल सकता है।

दूरी के कारण भीमलत रूट पर नहीं लग रही जिप्सी

उपवन संरक्षक एवं उपक्षेत्र निदेशक, रामगढ़-विषधारी टाइगर रिजर्व (कोर) बूंदी, अरुण कुमार डी ने बताया कि टाइगर रिजर्व के भीमलत बफर जोन में पर्यटकों के लिए रूट और एंट्री गेट तैयार हैं। हालांकि बूंदी से दूरी अधिक होने के कारण इस रूट पर जिप्सी संचालक जिप्सी लगाने के लिए तैयार नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि यदि स्थानीय लोग भीमलत क्षेत्र में पर्यटन के लिए जिप्सी लगाना चाहें तो विभाग इस रूट पर भी पर्यटन गतिविधियां शुरू करने के लिए तैयार है।

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विशेष संवाददाता

नागरिक अभिव्यक्ति विशेष डिजिटल रिपोर्टर एवं विश्लेषक।

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